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#LadengeCoronaSe: 69 साल के मेयर ने कोरोना को दी मात, जानिए कैसे निभा रहे हैं अपनी जिम्मेदारी

Wed, 28 Apr 2021 08:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मेयर शहर में निरीक्षण करने निकले। इस दौरान मास्क नहीं लगाने वालों को फटकार लगाई। बोले कि अति आवश्यक हो तभी बाहर निकलें।
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कोरोना से जंग जीतने के बाद निरीक्षण पर निकले मेयर सीताराम जायसवाल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के करीब 70 साल के मेयर सीताराम जायसवाल ने कोरोना को मात देकर फिर से शहर की सेवा में जुट गए। बुधवार को शहर का भ्रमण कर नगर निगम द्वारा किए जा रहे सैनिटाइजेशन व साफ सफाई का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सही ढंग से मास्क न लगाने वाले लोगों को फटकार लगाते हुए सावधानी बरतने को कहा।
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पिछले दिनों मेयर ने कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मिर्जापुर स्थित आवास पर होम क्वारंटीन कर स्वास्थ्य लाभ लिया। होम क्वारंटीन के बाद फिर से उन्होंने कोरोना संबंधी जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद बुधवार को दोपहर में मेयर शहर के निरीक्षण के लिए निकले। इस दौरान उन्होंने  नगर निगम की ओर से कराए जा रहे सैनिटाइजेशन और नाले की सफाई का निरीक्षण किया।  

निरीक्षण के दौरान मेयर ने कई लोगों को बिना मास्क पहने शहर में घूमते हुए देखा तो गाड़ी रुकवाई और संबंधित व्यक्ति को मास्क पहनने की नसीहत देते हुए कहा कि अगली बार ऐसा करते हुए पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मेयर ने शहर के लोगों से अपील की कि जहां तक संभव हो सके लोग अपने घरों पर ही रहें, बहुत आवश्यक कार्य पर ही बाहर निकले। 
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रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी मन में कभी नहीं आने दी नकारात्मकता

मेयर सीताराम जायसवाल ने कहा कि कोरोनावायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी मन में कभी नकारात्मकता नहीं आने दी। होम क्वारंटीन के दौरान भी दिन रात शहर के लोगों की सेवा में लगा रहा। रात 12 बजे भी अगर किसी ने फोन किया तब भी उसे उसी तरह से मदद की जिस तरह से कोई सुबह में छह बजे फोन करके मदद मांगता है।

जब कोरोना वायरस संबंधी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो प्रोटोकॉल के अनुसार अपने आप को होम क्वारंटीन कर दिया, लेकिन नकारात्मकता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दी। शहर के लोगों की सेवा पहले की तरह करने की ठानी और फिर लगातार यह क्रम बना रहा। 

इस दौरान एक बार एक महिला ने रात तकरीबन 12:00 बजे फोन कर कर अपने किसी परिजन के लिए ब्लड की आवश्यकता जताई तो मैंने उसी वक्त संबंधित व्यक्ति को फोन करके ब्लड उपलब्ध कराया। होम क्वारंटीन के दौरान शहर के हर एक व्यक्ति को फोन पर हर संभव मदद उपलब्ध कराया। 

इस तरह से ना सिर्फ मैं अपने आप को व्यस्त रखा बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरा करता रहा। फायदा यह हुआ कि मन में नकारात्मकता का भाव लगभग नहीं के बराबर आया। परिजनों का सहयोग तो हमेशा की तरह ही मिलता रहा।
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