उपभोक्ताओं की सही संख्या पता लगाने के लिए रसोई गैस कंपनियां अपने उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी करा रही हैं। ई-केवाईसी उपभोक्ता का बॉयोमीट्रिक या फोटो स्कैन कर किया जा रहा है। इसके लिए एजेंसियां उपभोक्ताओं को फोन कर ई-केवाईसी के लिए बुला रही हैं। साथ ही हॉकरों के माध्यम से भी उपभोक्ताओं से संपर्क किया जा रहा है।
कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक ई-केवाईसी न कराने वाले उपभोक्ताओं का सब्सिडी रोकी भी जा सकती है।
जिले में रसोई गैस की तीन कंपनियों के लगभग 12 लाख उपभोक्ता हैं। इंडियन ऑयल के सेल्स ऑफिसर के मुताबिक, कंपनी में उज्ज्वला गैस के एक लाख सात हजार उपभोक्ता पंजीकृत हैं। जबकि सामान्य रसोई गैस के छह लाख उपभोक्ता हैं। इसमें
से 60 फीसदी उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी करा ली है।
फिलहाल अभी रसोई गैस कंपनियां एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं की सभी संख्या पता लगाने के लिए ई केवाईसी करा रही हैं। ई-केवाईसी से ऐसे ग्राहकों का पता चल सकेगा, जिनकी मौत हो चुकी है और उनके संबंधी रसोई गैस उठा रहे हैं। या फिर ऐसे उपभोक्ता जो गोरखपुर में नहीं रहते हैं, उनका रसोई गैस सिलिंडर कोई दूसरा उठा रहा है।
भारत गैस के सेल्स ऑफिसर अभिषेक के मुताबिक, उज्ज्वला योजना के तहत जनपद में 67,100 उपभोक्ता हैं, जबकि सामान्य रसोई गैस के 1,28,300 उपभोक्ता हैं। उज्ज्वला रसोई गैस के 49 हजार उपभोक्ता और सामान्य रसोई गैस के 42 हजार उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाईसी कराई है।
उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी कराने के लिए रसोई गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ता अपना आधार कॉर्ड या बैंक पासबुक और रसोई गैस कार्ड लेकर संबंधित एजेंसी पर ई-केवाईसी करा लें। ई-केवाईसी बॉयोमीट्रिक या फोटो स्कैन कर किया जा रहा है:
अभिषेक, सेल्स ऑफिसर, भारत गैस
रसोई गैस के उपभोक्ताओं की सही संख्या का पता लगाने के लिए ई-केवाईसी कराई जा रही है। इसके लिए रसोई गैस एजेंसियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। लगभग 60 फीसदी उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी करा ली है:
गौरव, एरिया मैनेजर, इंडियन ऑयल