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गोरखपुरः 18 साल पहले जिसका कर दिया था ‘अंतिम संस्कार’, वह जिंदा लौटा

Wed, 03 Jun 2020 09:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा शत्रुघ्न चौहान, पादरी बाजार (गोरखपुर)

सार

  • घर छोड़कर चला गया था पादरी बाजार का शख्स, लॉकडाउन में काम छूटा तो लौटा घर
  • घरवालों ने काफी इंतजार के बाद प्रतीकात्मक पुतले को जलाकर किया था अंतिम संस्कार
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बेचन... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 शहर के जिस बेचन को मरा मानकर उसकी पत्नी व बेटियों ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वह लॉकडाउन के बीच 18 वर्ष बाद घर लौट आया। उसे देखकर बेटियां चहक उठीं। बोलीं, अब सिर पर पिता का साया रहेगा। एक की शादी नवंबर में होनी है। जब बेचन कमाने गया था, तब बेटियां छोटी थीं। अब बड़ी हो गई हैं। 

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जंगल सालिकराम पादरी बाजार के बेचन परिवार के भरण-पोषण के लिए अक्तूबर 2002 में पंजाब गए। मेहनत, मजदूरी की लेकिन घर नहीं लौट सके। कुछ दिन बाद हरियाणा, फिर दिल्ली में मजदूरी करके अपना पेट भरते और फुटपाथ पर सो जाते। लॉकडाउन हुआ तो कामकाज बंद हो गया। खाने के लाले पड़ गए तो बेचन को अपना परिवार याद आया। वह ट्रक की मदद से 5 मई को पादरीबाजार आ गए। मायके जाने की वजह से घर पर पत्नी तो नहीं मिली, लेकिन दो बेटियों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

बेचन की चार बेटियां हैं। दो की शादी हो चुकी है। अब घर में दो बेटियां हैं। बेटियों के मुताबिक, बेचन 2002 में कमाने गए थे लेकिन उसके बाद घर नहीं लौटे। मां सहित पूरे परिवार ने मान लिया कि उनकी मौत हो गई। इसके बाद 2012 में पिता का प्रतीकात्मक पुतला बनवाया गया। फिर रिक्शे से ले जाकर जंगल धूसड़ के आगे तुर्रा नाला पर प्रतीकात्मक पुतले को आग लगा दिया। मान लिया कि अंतिम संस्कार हो गया। 
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मौत के बाद जो औपचारिकता होती है, वह भी पूरी की गई थी। अब पिता जिंदा लौट आए तो बेटियों की खुशी का ठिकाना नहीं है। हालांकि बेचन को पछतावा है। वह कहते हैं कि कामकाज के चक्कर में गोरखपुर घर नहीं लौट सके। बीच में तबीयत भी खराब हो गई थी। अब जिम्मेदारी का एहसास हुआ तो लौट आए हैं। अब यहीं काम करेंगे। बेटियों की शादी अच्छे घरों में करेंगे। बेटियों को जो प्यार बचपन में नहीं दे सके, वह अब देंगे।
 

पत्नी ने चौका-बर्तन करके बेटियों को पाला, दो की शादी भी की

पति के घर नहीं लौटने के बाद चिंता देवी के सामने बच्चियों के लालन-पालन की चुनौती खड़ी हो गई तो उन्होंने घर-घर चौका-बर्तन मांजना शुरू किया। बेटियों को पालकर बड़ा किया, फिर दो की शादी भी की। बड़ी बेटी अंजनी की कुशीनगर तो दूसरी अंजोरा की शादी जौनपुर में हुई है। तीसरी की शादी इसी साल नवंबर में होनी है। 
 

सारी खुशियां नहीं मिलीं

बेचन भले ही 18 साल बाद लौट आए लेकिन उन्हें सारी खुशियां नसीब नहीं हुईं। नाराज पत्नी चिंता देवी घर छोड़कर चली गईं। उनका कहना है कि जब पति की जरूरत थी, एक-एक दाने और पैसे के मोहताज थे तो वे नहीं आए। अब काम नहीं मिला और खाने के लाले पड़े तो 18 वर्ष बाद लौट आए। ऐसे पति की जरूरत नहीं है, जो अपने घर और परिवार का ध्यान न रख सके।

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