मेहनत और मजदूरी की बदौलत ही हंसनाथ अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। इसके अलावा बेटे और चार बेटियों के हाथ पीले करने की भी उनके कंधों पर जिम्मेदारी थी। जबकि एक बेटी की पहले ही शादी कर चुके थे। हाल ही में वह एकलौते बेटे की भी शादी तय कर रखे थे। घर में चारों तरफ खुशियों का माहौल था। हंसनाथ की छह संतानों में सबसे बड़ी बेटी मुन्नी थी। इसके बाद इकलौता बेटा कन्हैया कुमार है।
बड़ी बेटी की शादी करने के बाद हंसनाथ घर में बहु लाने की तैयारी में जुटे थे। वह बेटे की शादी मई में तय कर रखे थे। शादी तय करने के बाद वह कहीं से भी मजदूरी के रुपये लाते थे तो पत्नी मंजू देवी से धीरे-धीरे शादी के समान खरीदते रहने के लिए सलाह दे रहे थे। अब कन्हैया के कंधे पर एक तरफ उसकी शादी और दूसरी तरफ चार बहनों प्रीती, बेबी, खुशी और नीलम के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी आ गई है।