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Gorakhpur News: बम मारकर विधायक की हत्या से सुर्खियों में आया माफिया राकेश

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माफिया के ही इशारे पर बेची व खरीदी जाती हैं विवादित जमीन



माफिया पर दर्ज हैं 52 मुकदमे, लेकिन ज्यादातर में खुद को बचाने में सफल रहा



राकेश ने राजनीतिक संबंधों को खूब भुनाया, बच भी गया, लेकिन सरकार बदलने के बाद बढ़ गई आफत

- अब माफिया राकेश के घर का नक्शा, पत्नी के नाम की संपत्ति भी खंगाल रही पुलिस, जीडीए को लिखा पत्र

अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। अंडरग्राउंड होकर जमीन का धंधा करने वाला माफिया राकेश यादव बदमाशों की सूची में जिले के टॉप-10 और प्रदेश के टॉप-61 में शामिल है। राकेश यादव की जड़ें जमीन के धंधे में इतनी गहरी हैं कि विवादित भूमि पर कब्जा करने से लेकर उसे बेचने तक में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। 90 के दशक में अपराध में कदम रखने वाले इस माफिया पर 52 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में वह 25 मार्च 1996 को तब आया जब मानीराम के तत्कालीन विधायक ओमप्रकाश पासवान की माल्हनपार रोड पर चुनावी जनसभा में बम मारकर हत्या कर दी गई और राकेश यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया।

माफिया राकेश यादव ने जेल से छूटने के बाद लंंबे समय तक नेपाल में शरण ली थी। इस बीच गुपचुप वह अपराध जगत में अपनी जड़ें जमाने में लगा रहा। पुलिस उसकी गतिविधियों से अनजान रही। राकेश के बदले अंदाज का पता पुलिस को 2021 में तब चला, जब उसके शूटर विपिन सिंह ने दिनदहाड़े फिल्मी अंदाज में तीन लोगों पर गोली बरसा दीं थीं। पुलिस ने इस मामले में विपिन सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया साथ ही राकेश यादव को केस का आरोपी बनाया। बाद में वह कोर्ट से रिहा हो गया और जमीन के धंधे से जुड़ गया। जमीन के धंधे में पांव जमाने के बाद उसकी अदावत नए उम्र के बदमाशों से हो गई।
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इस बीच राकेश का नाम कई मामलों में सामने आया, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया जा सका। उसने अपने राजनीतिक संबंधों को जमीन के धंधे और अपराध में खूब भुनाया। प्रदेश में सत्ता बदली तो कई मामलों में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा।पुलिस के मुताबिक, छोटू प्रजापति भी राकेश यादव के साथ ही मिलकर जमीन का धंधा करता था। बाद में वह राकेश का साथ छोड़कर खुद अपना धंधा चमकाने लगा। यह बात राकेश यादव को खटकने लगी। फिर 2021 में इसी फेर में उसकी छोटू प्रजापति से तकरार हुई।

छोटू पर राकेश के गुर्गे विपिन सिंह ने दो बार हमला किया था। दूसरी बार हमले के दौरान विपिन पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। इसके बाद राकेश यादव का नाम सामने आया। पुराने मामले में जमानत खारिज कराकर वह 15 जुलाई को कोर्ट में हाजिर हो गया। बाद में 25 जुलाई को उसे देवरिया जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां से रिहा हो गया और फिर पुलिस ने गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर जिला बदर कर दिया। हालांकि, पता चला है कि पुलिस में सांठगांठ कर वह देवरिया में हाजिर नहीं हो रहा है।

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छह मुकदमे चिह्नित, कोर्ट में पैरवी कर सजा दिलाएगी पुलिस

माफिया राकेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से छह मामलों में अब पुलिस कोर्ट में पैरवी करेगी। कोर्ट में गवाही, साक्ष्य प्रस्तुत कराएगी ताकि सजा हो सके। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी के मुताबिक, पीपीगंज थाने में दर्ज गैंगस्टर केस अपराध संख्या 89/91, गुलरिहा थाने में दर्ज 332/99, गुलरिहा में दर्ज आर्म्स एक्ट अपराध संख्या 333/99, गुलरिहा के अपराध संख्या 600/19, पिपराइच में दर्ज अपराध संख्या 77/2020, गुलरिहा एक्ट अपराध संख्या 870/20 की पैरवी पुलिस करेगी।

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1988 में पहली बार हत्या की कोशिश में हुआ था नामजद

माफिया राकेश यादव पर 1988 में चिलुआताल थाने में हत्या की कोशिश का पहला केस दर्ज हुआ था। उसके बाद 1990 में पीपीगंज थाने में हत्या का केस दर्ज हो गया। इन दो मामलों में नाम सामने आने के बाद राकेश पर लगातार केस दर्ज किए गए। पीपीगंज, गुलरिहा, शाहपुर, चिलुआताल, कोठीभार, महराजगंज, खजनी, कोतवाली, झंगहा, संतकबीरनगर के महुली, बांसगांव, सहजनवां, गोरखनाथ, पिपराइच थाने में कुल 52 मुकदमे माफिया पर दर्ज हैं। इसमें अपहरण, रंगदारी, हत्या, गैंगस्टर, गुंडा सहित अन्य मामले शामिल हैं।

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जब्त हुई थी 75 लाख की संपत्ति, अब जुटा रहे करीबियों की संपत्तियों का ब्योरा

माफिया राकेश यादव की 74 लाख 95 हजार रुपये की अवैध संपत्ति पुलिस जब्त करा चुकी है। अब एक बार फिर सुर्खियों में नाम आने के बाद पुलिस की ओर से पत्नी व ऐसे करीबियों की संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है, जिसमें माफिया राकेश यादव का पैसा लगा हो। इसके लिए पुलिस की ओर से जीडीए को पत्र लिखा गया है।

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राकेश का भाई और उसकी पत्नी कर रहे थे फर्जी डिग्री पर नौकरी

माफिया राकेश यादव के भाई चंद्रशेखर यादव और उसकी पत्नी रेनू यादव फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे थे। गुलरिहा इंस्पेक्टर रवि राय की जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद पुलिस की रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई थी। गुलरिहा थाने के दरोगा की तहरीर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का केस दर्ज किया गया था। उस समय पति-पत्नी महराजगंज में तैनात थे। संपत्ति की जांच के लिए बनाई गई टीम ने फर्जीवाड़ा सामने लाया था।
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कोट

माफिया राकेश यादव जमीन का धंधा करता है। पुलिस उसकी पूरी कुंडली खंगाल रही है। जीडीए को भी संपत्ति और नक्शे के लिए पत्र लिखा गया है। माफिया ने जिनकी जमीनों पर कब्जा किया है, उसके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। - मनोज अवस्थी, एसपी नार्थ
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