गोरखपुर। वित्तीय वर्ष के अंतिम कार्य दिवस के मौके पर शनिवार को बैंक शाखाओं में चालान जमा करने के लिए लाइन लगी रही। जबकि रविवार को अवकाश के दिन भी कुछ बैंक शाखाएं खुली रहेंगी ताकि वित्तीय लेन देने की प्रक्रिया बाधित न हो। बैंकों के साथ ट्रेजरी और सरकारी विभागों में भी कार्यों को लेन देने संबंधी कार्याें का रिकॉर्ड तैयार में करने में अधिकारी कर्मचारी मशगूल रहे।
सरकारी कार्यालयों के साथ ही निजी क्षेत्र के लोगों ने 31 मार्च से पहले अपना लेन देन का रिकॉर्ड सुधारा। यहीं कारण है कि बैंक काउंटरों पर लोगों की भीड़ अधिक रही। व्यापारियों ने नगदी को बैंक खाते में जमा किया और उसके बाद आरटीजीएस करके रकम जमा की। 31 मार्च रविवार को साप्ताहिक अवकाश है । इस कारण व्यापारियों ने शनिवार को ही रिकॉर्ड अपडेट किया। बैंकों में अब ज्यादातर कार्य ऑनलाइन अपडेट है, लेकिन अन्य विभागों व लोगों के कार्य के लिए बैंक खुले थे।
विकास भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग, आरईएएस, पशु पालन, कृषि सहकारिता सहित अन्य विभागों के कार्यालय खुले रहे। इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग के कार्यालयों में भी वित्तीय लेन देन की प्रक्रिया पूरी करने के कार्य हुए। भारतीय स्टेट बैंक मुख्य ब्रांच के उप प्रबंधक अजय कुमार राय ने बताया कि शनिवार को वित्तीय वर्ष का अंतिम कार्य दिवस था, इस कारण अधिक लोगों ने चालान जमा किया।
व्यापारियों ने जमा की नगद, फिर भेजा खाते में
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर।
कपड़े सहित अन्य व्यापारियों ने शनिवार को नगदी बैंक में जमा की और उसे आरटीजीएस के माध्यम से कंपनियों-व्यापारियों के बैंक खाते में भेजा। लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से माल खरीदकर 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं दे पाने वाले कारोबारियों पर आयकर का अतिरिक्त भरना पड़ेगा। इस कारण अंतिम कार्य दिवस पर व्यापारियों ने भुगतान करने की पूरी कोशिश की।
31 मार्च तक 45 दिन के पहले खरीदे गए कपड़े का भुगतान नहीं होने पर उस राशि को आय में जोड़ा जाएगा। आय ज्यादा दर्ज होगी तो आयकर भी अतिरिक्त देना होगा। व्यापारियों का कहना है कि लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से खरीदे गए माल पर यह नियम लागू होगा। चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के अध्यक्ष राजेश निभानी ने बताया कि कपड़े का ज्यादातर कार्य उधार में होता है। इस बार नया नियम लागू हुआ तो व्यापारियों ने पूरी कोशिश की कि पुराना बकाया न रह जाए। जिन्होंने 45 दिन से अधिक पुराने बकाया का भुगतान नहीं किया है, वे अतिरिक्त आयकर जमा करने में टूट जाएंगे।
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