आरोप है कि उसे शादीशुदा न होने का प्रमाणपत्र भी दे दिया गया। इसके बाद सचिव और बीडीओ ने 22 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शादी के मंडप में बैठा दिया। फेरे के बाद प्रमाणपत्र पर उसने अपने पति का नाम भी दर्ज करा लिया। मामले की शिकायत के बाद एलआईयू ने अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। वहीं, दूसरी तरफ बीडीओ ने योजना के तहत दिया गया सामान भी वापस मंगवा लिया है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि इस मामले की जानकारी आयोजन के दिन ही हो गई थी। इसलिए उनकी विवाह प्रक्रिया रोक दी गई थी। सरकार की तरफ से दिए जाना वाला उपहार आदि वापस ले लिया गया था। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है।