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लाठी-डंडे लेकर निगरानी कर रहे ग्रामीण: जंगल से निकलकर आबादी में पहुंचा तेंदुआ, दर्जनभर गांवों में दहशत

Thu, 06 Jul 2023 02:11 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी महराजगंज।

सार

मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजित कुमार ने कहा कि तेंदुए से डरने की जरूरत नहीं है। आबादी जंगल से सटे होने के चलते कभी-कभार तेंदुए भोजन की तलाश में आ जाते हैं। उसके बाद पुनः जंगलों की ओर लौट जाते हैं। लोगों से अपील है कि तेंदुए के साथ छेड़खानी न करें। वन कर्मियों की टीम मौके पर जांच के लिए भेज दी गई है।
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नदी के किनारे तेंदुआ को खोजते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के मधवलिया रेंज के बसौली बीट के जंगल से निकलकर बुधवार को एक तेंदुआ सुकड़हर गांव में जा पहुंचा। तेंदुए की सूचना पर आसपास के दर्जनभर गांवों में दहशत फैल गई। इस बीच, तेंदुआ एक कुत्ते को दबोच कर चंदन नदी के किनारे उगीं झाड़ियों में छिप गया। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीण भी झुंड में लाठी-डंडे लेकर निगरानी करते दिखे, जबकि तेंदुए के भय से महिलाएं और बच्चे घरों में कैद हो गए।

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सुकड़हर गांव के सुग्रीव, कल्लू, सीताराम, मुलायम, अनिरुद्ध, भोलू आदि ने मधवलिया रेंज के बसौली बीट के जंगल से अक्सर तेंदुए गांव में पहुंच जाते हैं। बुधवार को दुआ अपने दो शावकों के साथ भोजन की तलाश में आबादी में पहुंच गया। गांव में रामअवध का पालतू कुत्ता टहल रहा था, जिसे उसने अपना शिकार बना लिया।

कुत्ते की आवाज सुन ग्रामीण ने शोर मचाने तो तेंदुआ शावकों के साथ कुत्ते को लेकर चंदन नदी के किनारे झाड़ियों में जा छुपा। तेंदुए के झाड़ी से बाहर निकलने का काफी देर तक इंतजार किया गया। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। तत्काल विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे और तेंदुआ की तलाश शुरू की।
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एक सप्ताह पहले भी दिखा था तेंदुआ

ग्रामीणों का कहना कि तेंदुआ एक सप्ताह पहले भी आबादी के करीब देखा गया था। तब तेंदुआ बगैर शिकार के ही कुछ देर बाद जंगल की ओर चला गया। बुधवार को तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ गांव में आया और पालतू कुत्ते का शिकार कर लिया।

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सात साल पहले 12 लोगों को तेंदुए ने किया था घायल
करीब सात साल पहले तेंदुए ने 12 लोगों को घायल किया था। 28 दिसंबर 2016 को मोहम्मदा गांव में तेंदुए ने तांडव मचाया था। गांव के 12 लोग हमले में घायल हुए थे। 29 दिसंबर 2016 को पनियरा थाना क्षेत्र के सुचितपुर बघौना गांव में तेंदुए ने दो लोगों पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। 19 दिसंबर 2017 को थाना क्षेत्र कोल्हुई की ग्राम सभा लक्ष्मीपुर कैथवलिया में घुसकर एक तेंदुआ ने तीन लोगों को घायल किया था।
 
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अक्सर शिकार की तलाश में आबादी में आते हैं तेंदुए

तेंदुआ का पदचाप देखकर डरे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला।
तेंदुए अक्सर जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। कभी लोगों पर हमला करते हैं तो कभी कुत्ते व बकरियों को शिकार बनाकर चले जाते हैं। 25 अप्रैल 2020 को जंगल से सटे गांव बड़हरा चरगहा के टोला छावनी निवासी विनोद चौहान की झोपड़ी में बंधी एक बकरी को तेंदुआ मार कर जंगल में उठा ले गया था। 26 मई 2020 को निचलौल रेंज के उत्तरी बीट से सटे रामचन्द्रही में केले के खेत में काम कर रहे लोगों पर तेंदुआ ने दिनदहाड़े हमला बोल दिया था।

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इस दौरान संदीप, राजन, सुदर्शन ,गजेंद्र मौर्य ,गणेश गौंड़ गंभीर रूप से घायल हुए थे। 28 नवंबर 2021 को बरतानी टोला में तेंदुए ने एक बालक को मार डाला था। उसी रात तेंदुआ दोबारा गांव में आया और गाय को घायल कर दिया। 11 अगस्त 2022 को उत्तरी चौक रेंज के घोड़ाहवा बीट के जंगल से सटे गांव चकदह टोला बेलभार के पिंटू यादव के 10 वर्षीय बेटे अमित यादव को तेंदुए ने मार डाला था।

मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजित कुमार ने कहा कि तेंदुए से डरने की जरूरत नहीं है। आबादी जंगल से सटे होने के चलते कभी-कभार तेंदुए भोजन की तलाश में आ जाते हैं। उसके बाद पुनः जंगलों की ओर लौट जाते हैं। लोगों से अपील है कि तेंदुए के साथ छेड़खानी न करें। वन कर्मियों की टीम मौके पर जांच के लिए भेज दी गई है।

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