उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सहजनवां तहसील क्षेत्र के मुस्तफाबाद उर्फ मलउर गांव के निवासी जियाऊ पाल पुत्र हरिद्वार को जिंदा रहते ही सरकारी दस्तावेजों में मृत बना दिया गया। तत्कालीन लेखपाल ने पैतृक संपत्ति के दस्तावेज में जियाऊ को मृत घोषित कर उसके पुत्र चौथी के नाम से वरासत कर दिया। जबकि जियाऊ के परिवार में चौथी नाम का कोई व्यक्ति नहीं है।
यह मामला तब सामने आया जब एक सप्ताह पहले जियाऊ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए तहसील मुख्यालय पहुंचे। जियाऊ का कहना है कि वहां पता चला कि तत्कालीन लेखपाल ने वर्ष 2009 में उन्हें मृत घोषित कर वरासत में चौथी पुत्र जियाऊ का नाम दर्ज कर दिया।
जियाऊ ने जब खतौनी निकलवाई तो मामले की जानकारी हुई। इसकी शिकायत तहसील संपूर्ण समाधान दिवस में की गई तो अधिकारियों ने न्यायालय में मुकदमा पंजीकृत कराने को कहा। जियाऊ का कहना है कि 12 साल पहले उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित करने के बाद तहसील प्रशासन की ओर से बीते नौ जनवरी को जाति प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।
इस संबंध में बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री भूपेंद्र तिवारी का कहना है कि जियाऊ को कूटरचित तरीके से मृतक घोषित कर उनकी संपत्ति हड़पने का कृत्य राजस्व कर्मचारी ने किया है। यह न्याय विरुद्ध है। उधर, उपजिलाधिकारी सुरेश कुमार राय और तहसीलदार शशि भूषण पाठक का कहना है कि मामला संज्ञान में है। पत्रावली की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।