लॉकडाउन के बीच उद्योग, विकास परियोजनाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रशासन जुट गया है। कमिश्नर जयंत नार्लिकर का कहना है कि सरकार की तरफ से 20 अप्रैल से मिली छूट के बाद मंडल में पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग और विकास परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। स्थानीय से लेकर बाहर से लौटे 60 हजार से अधिक मजदूरों को उनके गृह जनपद में ही रोजगार मुहैया कराया गया है।
कमिश्नर ने कहा कि मंडल के चारो जिलों गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में विकास धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली है। तीन मई के बाद इसे और गति दी जाएगी। गांव से लेकर शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में 20 हजार से अधिक छोटे, मझले और बड़े उद्योग के साथ ही सभी विकास परियोजनाओं को भी शुरू कराया जाएगा।
सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया गया है कि वे उद्योगपतियों से संवाद स्थापित कर ज्यादा से ज्यादा स्थानीय मजदूरों को काम दिलाएं। इसी तरह विभिन्न विकास परियोजनाओं, एक जिला एक उत्पाद और मनरेगा में भी बाहर से आए मजदूरों को काम दिया जाए।
कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने बताया कि मंडल में पांच हजार से अधिक उद्योग, विकास परियोजनाओं को शुरू कराया जा चुका है। बाकी को लेकर कार्ययोजना बन रही है। बड़ी संख्या में बाहर से आए मजदूरों को रोजगार भी दिलाया जा रहा है। तीन मई के बाद विकास कार्यों को और गति मिलेगी। कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क या गमछे का अनिवार्य तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर निगरानी की जा रही है।