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जानिए कितने प्रतिशत लोग हो सकते हैं कोरोना के वाहक, यूनीसेफ ने दी पूरी जानकारी

Mon, 15 Jun 2020 03:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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कोरोना वायरस। - फोटो : PTI
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क्या कोरोना संक्रमित स्वस्थ होने के बाद पुन संक्रमित हो सकता है? होम क्वारंटीन परिवार में टीकाकरण कैसे होगा? निगरानी समिति में सिर्फ आशा कार्यकर्ता और प्रधान ही सक्रिय दिख रहे हैं? इन सभी सवालों पर चर्चा हुई और बेहतर उत्तर भी प्राप्त हुए। साथ ही कोरोना के हर पहलू पर बात हुई।

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यूनीसेफ के प्रशिक्षक डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि 100 में से 81 लोगों को यह बीमारी कम लक्षणों के साथ होती है और अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन चिंता का विषय यह है कि यह 81 लोग भी कोरोना के वाहक हो सकते हैं।

14 फीसदी लोगों में गंभीर लक्षण दिखते हैं जबकि 4.7 फीसदी लोगों में यह बीमारी क्रिटिकल रूप धारण कर लेती है। उन्होंने प्रवासियों के बारे में व्यवहार परिवर्तन पर खासतौर से जानकारी दी। यूनीसेफ के ही प्रशिक्षक सत्यवीर ने निगरानी समितियों के बारे में समझाते हुए बताया कि जिनके घरों में होम क्वारंटीन का इंतजाम न हो उन्हें निगरानी समिति को प्रयास करके कम्युनिटी क्वारंटीन की व्यवस्था करवानी चाहिए।
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संचार का काफी महत्व-सीएमओ

यूपीटीएसयू की डॉ. शालिनी रमन ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण के प्रति सावधान रहते हुए वीएचएनडी, एचबीएनसी, मातृ, शिशु, किशोर स्वास्थ्य संबंधित सेवाएं जारी रखनी हैं। सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) की नेशनल प्रोजेक्ट लीड रंजना द्विवेद्वी ने मीडिया ट्रेंड के बारे में विस्तार से चर्चा की। यूनीसेफ के दयाशंकर सिंह ने कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण अंग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को भी देने की आवश्यकता है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि कोरोना की रोकथाम में संचार का काफी महत्व है। गोरखपुर जनपद के डीएचईआईओ, सभी एचईओ और कुछ जगहों पर बीसीपीएम ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया है। हमें उम्मीद है कि यह प्रशिक्षण कोरोना के प्रति जनजागरूकता लाने में मिल का पत्थर साबित होगा।

 
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