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Gorakhpur News: मनमाना अंक अपलोड करने पर किसान पीजी कॉलेज तीन साल के लिए डिबार

Fri, 23 Aug 2024 04:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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- कुशीनगर के किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय को एक लाख रुपए का अर्थदंड
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- तीन साल तक महाविद्यालय में नहीं होगी प्रायोगिक परीक्षा
- परीक्षक को बिना बताए अपलोड कर दिए थे आंतरिक मूल्यांकन के अंक

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पैकोली हाटा, कुशीनगर में अगले तीन साल तक प्रायोगिक और मौखिक परीक्षा नहीं होगी। यहां के विद्यार्थियों की मौखिक और प्रायोगिक परीक्षाएं दूसरे केंद्र पर कराई जाएगी। बाह्य परीक्षक को बिना बताए अंक अपलोड करने के मामले में विश्वविद्यालय ने कॉलेज पर कार्रवाई की है। साथ ही एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष सेवानिवृत प्रो. केके मिश्रा करीब दो माह पहले किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पैकोली हाटा, कुशीनगर में बतौर बाह्य परीक्षक बीए द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों की मौखिक परीक्षा लेने गए थे। आंतरिक परीक्षा के रूप में उसी कॉलेज के डॉ. अरुणेश त्रिपाठी नियुक्त थे। दोनों शिक्षकों ने संयुक्त रूप से कुलपति को लिखे शिकायती पत्र में कहा था कि परीक्षा संपन्न होने के बाद जब डाॅ. अरुणेश काॅलेज के कंप्यूटर पर अंक अंकित कराने के लिए गए तो काॅलेज प्रबंधक सत्य प्रकाश सिंह और पूर्व प्राचार्य डाॅ. चंद्रशेखर सिंह ने यह कहते हुए मना किया कि आप चिंता न करें नंबर फीड हो चुका है। परीक्षकों को जब पता चल कि कॉलेज ने पहले ही अंक फीड कर दिए हैं तो उन्होंने शिकायती पत्र के साथ ही बीए द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के मौखिक परीक्षा के अंकों का विवरण भी विश्वविद्यालय को सौंप दिया। मामले में विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। इन्होंने अपनी रिपोर्ट परीक्षा समिति को सौंप दी थी। परीक्षा समिति ने इस कार्रवाई का निर्णय लिया है।
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सेंट एंड्रयूज कॉलेज पर एक लाख रुपये जुर्माना
गोरखपुर। डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने सेंट एंड्रयूज कॉलेज पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि आगे से इस तरह का मामला सामने आने पर कानूनी कार्यवाही करेगा।
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सम सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम आने के बाद दो विद्यार्थी कुलपति प्रो. पूनम टंडन से मिले थे। उन्होंने बताया था कि उन्होंने परीक्षा दी है लेकिन उनका अंक नहीं चढ़ा। इसकी जांच की गई तो पता चला कि उन विद्यार्थियों का परीक्षा फॉर्म ही नहीं भरा गया था। विद्यार्थियों को यह बताया गया तो उन्होंने परीक्षा शुल्क की रसीद दिखाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच का आदेश दिया था। इस दौरान कुछ अन्य छात्र-छात्राएं भी यही समस्या लेकर पहुंचे थे। जांच में पाया गया कि विद्यार्थियों द्वारा दिखाई गई रसीद असली है। बिना फॉर्म भरे विद्यार्थियों को परीक्षा दिलाने को समिति ने गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी। परीक्षा समिति ने एक लाख रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। मामले में परीक्षा समिति ने छात्र हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार किया। विचार के बाद छात्रों की कॉपियों का मूल्यांकन कर रिजल्ट जारी करने का निर्णय लिया गया है।
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