शव को गोपाल मंदिर ले जाते रिफ्यूजी कॉलोनी के लोग।
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जड़ों से उखड़कर कई कोस दूर आकर बसे मोहद्दीपुर स्थित रिफ्यूजी कॉलोनी के लोग अपनी संस्कृति से आज भी उसी शिद्दत से जुड़े हैं। परंपराओं का निर्वहन वैसे ही कर रहे हैं जैसे अपने मूल निवास स्थान पर करते थे। आज भी यदि इनके परिवार में कोई अपनी देह त्यागता है तो यह लोग उसके शरीर को गोपाल मंदिर में ले जाकर रखते हैं। कान्हा (श्रीकृष्ण भगवान) से इस आस में अंतिम विदाई लेते हैं कि गतात्मा को स्वर्ग में स्थान मिलेगा। इसके बाद शवयात्रा शुरू होती है।
देश की आजादी के बाद पाकिस्तान से आए 50 से 60 परिवारों ने गोरखपुर में शरण ली। ये लोग पहले से रह रहे रिश्तेदारों के पास ठौर-ठिकाना ढूंढने आए थे। साल 1951-52 में सरकार ने ऐसे लोगों के रहने के लिए मोहद्दीपुर में एक कॉलोनी बनाई, जिसका नाम रिफ्यूजी कॉलोनी रखा गया। अब इस कॉलोनी को रामनगर कॉलोनी कहा जाने लगा है।
इस कॉलोनी में रहने वाले ज्यादातर लोग सिख समाज से संबंध रखते हैं। इनके पुरखे भगवान श्रीकृष्ण को ईष्टदेव मानते हैं। पाकिस्तान में भी गुरुद्वारे के बाद श्रीकृष्ण मंदिर में ही शव ले जाते थे और अंतिम विदाई दिलाते थे। इसी रवायत को यहां भी निभा रहे हैं। कॉलोनी के जगदीश आनंद बताते हैं कि श्रीकृष्ण भगवान में हमारी आस्था है। ऐसी मान्यता है कि गोपाल मंदिर में शव को भगवान से विदाई लेने के बाद स्वर्ग में स्थान मिलता है। पिताजी बताते हैं कि कई पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है।