कथक नृत्य करतीं जयंती माला व उनकी टीम।
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर महोत्सव में कथक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का मन मोह लिया। महोत्सव की शुरुआत जयंती माला के नृत्य तो शाम को पुन: नेहा बनर्जी की प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
मुंबई से आईं बनारस घराने की जयंती माला व उनकी टीम ने प्रस्तुति की शुरुआत गणपति वंदना से की। इसके बाद शिव तांडव कर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। जयंतीमाला ने सोलो डांस की प्रस्तुति के बाद परंपरागत कथक की प्रस्तुति तोड़े टुकड़े, आमद गट निकास, पद क्रिया व जुगलबंदी के साथ की। राधा-कृष्ण पर आधारित यह प्रस्तुति दर्शकों के दिल को छू गई और वातावरण तालियों से गूंज उठा। अंत में जयंतीमाला ने जमुना तट श्याम खेलें होरी गीत पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया।
कथक की दूसरी प्रस्तुति मुंबई से आईं लखनऊ घराने की नेहा बनर्जी व उनकी टीम की थी। शिव वंदना से उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद दशावतार (मीन, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध व कल्कि) प्रस्तुति दी। भगवान विष्णु के दसों अवतारों पर आधारित इस प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उनके सहयोगी कलाकारों में आशीष सिंह, सुनिधि पाठक व चैतन्य मंगलम रहे। वाद्ययंत्रों में तबला पर विवेक मिश्रा व भोलानाथ मिश्रा, सितार पर ध्रुव नाथ मिश्रा थे। कार्यक्रम के संयोजक हरिप्रसाद सिंह, राकेश श्रीवास्तव व डॉ. शरदमणि थे।