किसानों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन करने पर तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने धमकाया। बताया कि ऊपर से आदेश है। इसलिए कोई विरोध न करें। यदि किसी ने उनकी बात नहीं मानी तो मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। इसके बाद भी किसान अपनी मांग पर डटे रहे। इससे करीब दो घंटे तक गहमा गहमी बनी रही।
दो किलोमीटर धूप में पैदल थाने ले जाए गए किसान
किसान निर्माण कार्य रोकने पहुंचे तो प्रशासनिक अमला पूरी तरह से हर स्थिति से निपटने को तैयार था। किसानों को काबू करने के लिए जब चार थानों की फोर्स पहुंची तो किसान भी स्थिति भांप गए। पुलिस ने सभी किसानों को थाने पहुंचा दिया।
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मौके से करीब दो किलोमीटर तक किसानों को पैदल ही थाने ले जाया गया। नारेबाजी करते हुए किसान थाने पहुंचे। वहां करीब आधा घंटा तक सभी को रोका गया। उनका नाम-पता नोट करने के बाद पुलिस ने छोड़ा। हिदायत दी कि अभी पाबंद किया जा रहा है। आगे और सख्ती हो सकती है।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया पाबंद
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 107 व 116 की कार्रवाई में लोगों को पाबंद किया जाता है। इसमें सक्षम न्यायालय पर जाकर पक्षकारों को जमानत करानी होती है, जिसमें छह माह के लिए एक मुश्त धनराशि के लिए पाबंद किया जाता है। छह माह के अंतराल में अगर कोई विवाद होता है, तो वह धनराशि जब्त करने का नियम है।