बाएं हिमांशु और दाएं सूरज कुमार चौधरी। (फाइल फोटो)
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अनुकंपा पर नौकरी हासिल करने में परेशानी भले ही झेलनी पड़ी लेकिन योग्यता को ही तरजीह मिली। अर्दली के बेटे को जहां बाबू पद पर नौकरी मिली, वहीं पुलिस महकमे के मुख्य आरक्षी और आरक्षी के बेटे-बेटी को दरोगा पद पर नौकरी मिली।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कोतवाली क्षेत्र के छबिलहाखोर निवासी लालचंद गिरी डीएम के अर्दली थे। 14 अप्रैल 2019 को उनकी हार्टअटैक से मौत हो गई। उनके दो बेटे और तीन बेटियां है। आश्रित कोटे में बड़े बेटे हिमांशु गिरी ने नौकरी पाने के लिए आवेदन किया। तत्कालीन डीएम रवीश गुप्त ने वर्ष 2020 में हिमांशु गिरी को आश्रित कोटे में बाबू पद पर नौकरी दी।
हिमांशु गिरी ने बताया कि वह स्नातक हैं। बड़े भाई दिपांशु गिरी ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। जबकि दो बहनों की शादी हो गई है। प्रशासन ने योग्यता को तरजीह देते हुए उन्हें बाबू पद पर नौकरी दी। कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में उनकी तैनाती है।
श्रावस्ती जिले के इकौना थाना क्षेत्र के मध्यनगर मनोहरपुर निवासी अलखराम चौधरी संतकबीरनगर जिले के धर्मसिंहवा थाने पर हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। 19 मई 2016 को बीमारी से उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे और तीन बेटियां है। स्नातक तक पढ़ाई करने वाले उनके बड़े बेटे सूरज कुमार चौधरी ने आश्रित कोटे में दारोगा पद के लिए आवेदन किया।