जिले के ग्रामीण और दूरदराज के शहरी इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग रक्ताल्पता (एनीमिया) की बीमारी से बचाने में नाकाम साबित हो रहा है। वजह, जिले में पिछले तीन माह से आयरन की गोलियां ही नहीं हैं। आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग के ड्रग स्टोर से बिना आयरन गोली दिए लौटा दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओें के बेहतर स्वास्थ्य के लिए चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना के तहत आयरन की गोलियां बांटी जाती हैं।
नवंबर 2019 के बाद नहीं मिलीं आयरन की गोलियां
जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अंतिम बार 20 नवंबर 2019 को आयरन की गोलियों की अंतिम खेप मिली थी। तब करीब साढ़े दस लाख गोलियां मिली थीं। सूत्रों के अनुसार आयरन गोलियां बनाने वाली यूनिको क्योर कंपनी ने यह दवा बनानी ही बंद कर दी है, इसलिए करीब तीन माह से आपूर्ति नहीं हो रही।
इसलिए जरूरी है आयरन की गोली
जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष औसतन एक लाख महिलाएं गर्भ धारण करती हैं। इनमें से पैंसठ फीसदी से अधिक महिलाएं ग्रामीण और दूर शहरी इलाकों की रहने वाली हैं। इन महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल और टीकाकरण आशा बहुओं के जिम्मे है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी गुप्ता के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा घटने लगती है। इसके लिए गर्भधारण के तीसरे माह से प्रसव होने तक महिला को प्रतिदिन 30 ग्राम आयरन की गोली दी जाती है। यदि आयरन की गोली नहीं दी जाती तो गर्भवती एनीमिक हो जाती हैं, जिससे प्रसव में समस्या हो सकती है।
रक्ताल्पता से होती हैं ये समस्याएं
गर्भावस्था के दौरान रक्ताल्पता से थकान, सिर चकराने, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैर ठंडे पड़ने, आंखें अंदर धंसने आदि की समस्याएं होती हैं। गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास के लिए भी आयरन की आवश्यकता होती है, रक्त में हीमोग्लोबिन अधिक होने पर भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। आयरन की कमी से समय से पूर्व प्रसव, जन्म के समय शिशु का वजन कम होना और प्रसवकालीन मृत्यु की आशंका भी बढ़ जाती है।
आयरन की गोलियां खत्म हैं। निदेशालय को इस संबंध में कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। आपूर्ति होते ही सभी पीएचसी-सीएचसी पर आयरन गोलियां जारी कर दी जाएंगी।
डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ, गोरखपुर