- नवरात्र में शक्ति को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है कन्या पूजन
-कुंआरी कन्याओं में विद्यमान रहता है देवी अंश
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नवरात्र में शक्ति स्वरूपा कन्या पूजन का विधान है। नौ दुर्गा के रूप में नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। ज्योतिर्विदों के अनुसार कन्याओं में देवी का अंश विद्यमान रहता है। नवरात्र में लोग कन्याओं के पैर धूलकर, पोछकर पूजन करते हैं और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जबकि नवरात्र बीतने के बाद इसे भूलकर लोग देवी स्वरूपा कन्याओं से अपना चरण स्पर्श कराने की भूल करते हैं। ज्योतिर्विदों के अनुसार कभी भी कन्याओं से चरण स्पर्श नहीं कराना चाहिए, क्योंकि वह देवी की अंश होती हैं।
ज्योतिर्विद पं. शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि शास्त्र के अनुसार 2 से 10 वर्ष तक कन्या देवी स्वरूप में पूजनीय होती है। नवरात्र में ही इस उम्र की कन्याओं का पूजन किया जाता है। आगे चलकर कन्यादान की परंपरा में भी पांव पखाारने (पूजा) की रस्म होती है। लेकिन, लोग इस तथ्य को भूलकर कन्याओं के पैर छूने पर भी खुशकर आशीर्वाद देते हैं, जबकि यह धार्मिक परंपरा के विपरीत है। कन्याओं से कभी भी अपना चरण स्पर्श नहीं कराना चाहिए। क्योंकि हमारी धार्मिक मान्यता है कि कन्याओं में देवी का अंश विद्यमान रहता है। देवी स्वरूपा कन्याओं का पूजन और उन्हें सम्मान देवी से आदि शक्ति प्रसन्न होती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई प्रांतों में लोग कन्याओं से चरण स्पर्ण नहीं कराते हैं। इस संस्कृति को पूर्वांचल में भी स्वीकार करना चाहिए। कन्या पूजन के समय व्यक्ति के मन में जो भाव में रहता है, नवरात्र बाद भी उनके मन वैसा ही भाव होना चाहिए। शक्ति स्वरूपा के सम्मान करेंगे तो शक्ति प्राप्त होगी।
मनीष मोहन, ज्योतिर्विद
देवी उपासना का है विशेष महत्व
देवियां ईश्वर की स्त्री शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती की उपासना से शक्ति, अर्थ व विद्या की प्राप्ति होती है। त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने भी रावण का वध करने से पहले शक्ति की साधना की थी। सृष्टि ही नहीं, शक्ति स्वरूपा नारी शक्ति ही समाज में पुरुष की तरह प्रमुख स्तंभ है। बिना शक्ति के समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है।
पं. बृजेश पांडेय, ज्योतिर्विद
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नवरात्र व्रत का वैज्ञानिक महत्व
नवरात्र व्रत का न केवल अध्यात्मिक महत्व है, बल्कि चैत्र व शारदीय नवरात्र व्रत वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। धर्म शास्त्र के अनुसार शक्ति की उपासना से भक्तों में विभिन्न प्रकार की शक्तियों का संचार होता है। वहीं नवरात्र व्रत से शारीरिक शुद्धि होती है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है।
नवरात्र में दो ऋतुओं का सम्मिलन होता है। यह ऋतु परिवर्तन का समय रहता है, इसलिए रोगों के प्रकोप की आशंका बन जाती है। चैत्र नवरात्र में सर्दी से गर्मी के मौसम आता है तो लोगों के शरीर में पाचन तंत्र कमजोर होता है। ऐसे समय में व्रत करने से शरीर शुद्ध हाे जाता है और नए मौसम के लिए तैयार हो जाता है। उपवास के दौरान लोग फलाहार करते हैं जिससे स्वास्थ्य की रक्षा होती है। हवन से वातावरण में मौजूद कीटाणुओं का प्रकोप भी कम हो जाता है।
पं. शरद चंद्र मिश्र, ज्योतिर्विद
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