पावर ऑफ अटार्नी से बैनामा होने से प्रकाश में आई जमीन
तीन-चार दशक पहले डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन से जुड़े मूल खातेदारों के परिवार के एक सदस्य की हत्या हो जाने के बाद सभी खातेदार यहां अपनी संपत्ति छोड़ कोलकाता चले गए थे। तीन साल पहले जमीन के कुछ कारोबारियों ने कोलकाता में एक मूल खातेदार को तलाश लिया और पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए बैनामा शुरू कर दिया। इसकी सूचना जब तत्कालीन एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल को मिली तो उन्होंने मूल खातेदारों की तलाश शुरू कराई। लेखपालों की एक टीम कोलकाता के पते पर भेजी गई, मगर वहां कोई मिला ही नहीं। इसके बाद एसडीएम ने जरूरी जांच प्रक्रिया पूरी करते हुए जमीन लावारिस घोषित कर दी और इसे ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया।
मामला गरमाया तो वरासत निरस्त कर दी
जमीन का मामला खुलने के बाद आनन-फानन सदर तहसीलदार विरेंद्र गुप्ता ने वरासत निरस्त कर दी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई पूर्व की तारीख में की गई। फिलहाल राजस्व अभिलेखों में जमीन उद्यान विभाग के नाम ही दर्ज है। प्रशासन अब इसकी पैमाइश कराकर और सुरक्षित करने जा रहा है।
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि जांच में प्रथम दृष्टया पूर्व सदर तहसीलदार विरेंद्र गुप्ता ही दोषी पाए गए हैं। कार्रवाई के लिए की गई संस्तुति पर उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया है। जमीन, उद्यान विभाग के नाम दर्ज है। इसे और सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही बाकी सरकारी जमीनों का भी सत्यापन कराया जा रहा है।