कहते हैं जुनून और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। संजोए हुए सपने भी पूरे होते हैं। यह सृजन पांडेय पर सटीक बैठता है। फुटबाल खेलते समय मन में देश सेवा की लहर उठी तो सिपाही बनने की ठान ली। मगर कदम यहां पर नहीं थमे, सिपाही से आगे बढ़कर लेफ्टिनेंट बनकर सृजन ने कामयाबी की मिसाल कायम की और सैन्य अफसर बनकर देश सेवा में शामिल हो गए।
बढ़नी ब्लॉक के पड़रिया निवासी सृजन पांडेय को शिक्षा हासिल करने के लिए बचपन में ही माता-पिता से अलग होना पड़ा। ननिहाल उसका बाजार में रहकर जिला मुख्यालय पर स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल में हासिल की। उच्चतर शिक्षा हासिल करने के लिए देहरादून गए।
देहरादून में पढ़ाई के दौरान आरआईएमसी देहरादून की टीम के साथ मिलिट्री स्कूल में फुटबाल मैच में वहां का अनुशासन देखकर भारतीय सेना में जाने की ठान ली। प्रण किया कि सीधी भर्ती के माध्यम से सेना में सिपाही बनकर ही देश की सेवा करेंगे।
सेना में भर्ती के पांच प्रयास असफल हो गए, हर बार किसी न किसी कारण से छटनी हो गई लेकिन उनका जुनून कम नहीं हुआ। कदम यहीं रुकने वाले नहीं थे, उन्हें तो मंजिल हासिल करनी थी। वह मायूस नहीं हुए और मेहनत करते रहे।
मेहनत का नतीजा यह हुआ कि उनका चयन भारतीय नौसेना, वायुसेना और थल सेना तीनों में हुआ लकिन उन्होंने थल सेना चुनी। 2019 में वह थल सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित होने के बाद भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में प्रशिक्षण के लिए चले गए। गत 13 जून 2020 को उनका आईएमए देहरादून में उनका प्रशिक्षण पूरा हुआ।