परिवार के मुखिया पूर्व प्राचार्य छत्रधारी यादव अपना आदर्श अपने बड़े भाई स्व. आचार्य रामचंद्र यादव को मानते हैं। उनका कहना है भाई-भाई की भुजा होता है। संयुक्त परिवारों में विपत्ति को झेल जाने की अद्भुत क्षमता होती है। परिवार में कार्य का विभाजन है।
सुधाकर यादव जो केन यूनियन के बोर्ड ऑफ डारेक्टर के मेंबर रह चुके हैं। खेती किसानी और पशुपालन की जिम्मेदारी सम्भालते है उनके सहयोग के लिए गांव के गुलहसन और भरत हैं। सब्जी और दूध के लिए परिवार बाजार पर आधारित नहीं है, उक्त जरूरते पुश्तैनी खेती और पशुपालन से पूरा हो जाता है।
दिवाकर यादव उत्तर-प्रदेश परिवहन में ट्रैफिक इंस्पेक्टर हैं। जबकि अखिलेश रेलवे, शैलेश पुलिस, कमलेश सेना, सुरेश यादव पंचायत राज विभाग, गिरिजा देवी बाल व पुष्टाहार विभाग और सतपाल इंजीनियर हैं। परिवार के आदर्श राम चंद्र यादव के नाम से आर सी चिल्ड्रेन, राम चंद्र यादव इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज है जिसकी जिम्मेदारी उच्च शिक्षित राम उग्रह यादव और डॉ. राकेश यादव निभाते हैं।
परिवार के योगेंद्र यादव ‘जिज्ञासु’, डॉ. रेणु यादव, सुचित्रा यादव, उमेश यादव, सुचिता यादव और जयंती यादव शिक्षक हैं। दीपिका, प्रियम्वदा, ममता, रतन पाल, कुंवरपाल, समरपाल, गौरव, कृष्णपाल, राजदीप आदि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। धर्मपाल, शौरभ, पार्थ, प्रज्वल, उज्ज्वल, पथ्या, गार्गी, निशांत, शिवांगी, नितिन, आदेश अविरल, दीपशिखा व स्वधा आदि के स्कूली दिन हैं। परिवार को सजोने में वयोवृद्ध छबिया देवी, शांति और चंद्रावती देवी की विशेष भूमिका है। भोजन घर की महिलाएं मिलजुल कर बना लेती हैं। परिवार के ही शिक्षक योगेंद्र जिज्ञासु कहते हैं एकल जीवन पद्धति से भारत की प्रतिष्ठा पर ठेस पहुंचा है। गांव और परिवार को बचाना आज के समय की बड़ी चुनौती है।