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International Day of Families: गोरखपुर में साथ रहती हैं तीन पीढ़िया, संयुक्त परिवार में 71 सदस्य

Sun, 15 May 2022 02:59 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर विकास खंड ब्रह्मपुर में स्थित एक संयुक्त परिवार चर्चा का केंद्र बना रहता है। ऐतिहासिक महत्व वाले इस गांव में संयुक्त परिवार के अनिवार्य शर्तों मसलन एक तवे की रोटी, एक छत का निवास, तीन पीढ़ियों का साथ, सम्मलित आय, सम्मलित तरक्की आदि के साथ रहता है यह कुनबा।
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संयुक्त परिवार के लिए प्रेरणा है पूर्व प्राचार्य छत्रधारी यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हताश होते जीवन और बढ़ती वैमनष्यता के लिए परिवारों के टूटन भी जिम्मेदार है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा ने सार्वजनिक हित की हमारी परंपरा को काफी ठेस पहुंचाई है। सहोदर भाइयों के बीच बोल-चाल बंद हो। मां-बाप के लिए अनाथालय अस्तित्व में आ गए। ऐसे दौर में गोरखपुर के स्वावलंबी इंटर कॉलेज विशुनपुरा के पूर्व प्राचार्य छत्रधारी यादव का पांच दर्जन से ज्यादा का संयुक्त परिवार औरों के लिए नजीर है।

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गोरखपुर मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर विकास खंड ब्रह्मपुर में स्थित एक संयुक्त परिवार के कारण भी चर्चा का केंद्र बना रहता है। ऐतिहासिक महत्व वाले इस गांव में संयुक्त परिवार के अनिवार्य शर्तों मसलन एक तवे की रोटी, एक छत का निवास, तीन पीढ़ियों का साथ, सम्मलित आय, सम्मलित तरक्की आदि के साथ रहता है यह कुनबा।

71 लोगों का आवास चार खंडों में विभक्त है जिसमें भोजनालय, गोशाला, अतिथिशाला और आवास। गांव के किसान और पशुपालक राजबली यादव के चार पुत्र और एक पुत्री है जिनके बड़े पुत्र जिले के प्रतिष्ठित कॉलेज के प्राचार्य रह चुके स्व. राम चंद्र यादव ने प्रारंभ में शिक्षा का अलख जगाकर परिवार को शून्य से आगे बढ़ाया।
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दूसरे पुत्र राम कवल यादव जो दिवंगत है एक मजे हुए किसान थे। तीसरे पुत्र छत्रधारी जो उच्च शिक्षित है एक कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य है। गांव के वर्षों तक प्रधान रह चुके है। पुत्री गिलासी देवी की शादी पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी आर.एस यादव से वाराणसीे में हुई है। चौथे पुत्र पौहारी शरण यादव पूर्वी रेलवे कोलकाता में स्पोर्ट्स के जनरल सेक्रेटरी के पद से अवकाश ग्रहण कर चुके हैं।

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परिवार के मुखिया पूर्व प्राचार्य छत्रधारी यादव अपना आदर्श अपने बड़े भाई स्व. आचार्य रामचंद्र यादव को मानते हैं। उनका कहना है भाई-भाई की भुजा होता है। संयुक्त परिवारों में विपत्ति को झेल जाने की अद्भुत क्षमता होती है। परिवार में कार्य का विभाजन है।

सुधाकर यादव जो केन यूनियन के बोर्ड ऑफ डारेक्टर के मेंबर रह चुके हैं। खेती किसानी और पशुपालन की जिम्मेदारी सम्भालते है उनके सहयोग के लिए गांव के गुलहसन और भरत हैं। सब्जी और दूध के लिए परिवार बाजार पर आधारित नहीं है, उक्त जरूरते पुश्तैनी खेती और पशुपालन से पूरा हो जाता है।

दिवाकर यादव उत्तर-प्रदेश परिवहन में ट्रैफिक इंस्पेक्टर हैं। जबकि अखिलेश रेलवे, शैलेश पुलिस, कमलेश सेना, सुरेश यादव पंचायत राज विभाग, गिरिजा देवी बाल व पुष्टाहार विभाग और सतपाल इंजीनियर हैं। परिवार के आदर्श राम चंद्र यादव के नाम से आर सी चिल्ड्रेन, राम चंद्र यादव इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज है जिसकी जिम्मेदारी उच्च शिक्षित राम उग्रह यादव और डॉ. राकेश यादव निभाते हैं।

परिवार के योगेंद्र यादव ‘जिज्ञासु’, डॉ. रेणु यादव, सुचित्रा यादव, उमेश यादव, सुचिता यादव और जयंती यादव शिक्षक हैं। दीपिका, प्रियम्वदा, ममता, रतन  पाल, कुंवरपाल, समरपाल, गौरव, कृष्णपाल, राजदीप आदि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। धर्मपाल, शौरभ, पार्थ, प्रज्वल, उज्ज्वल, पथ्या, गार्गी, निशांत, शिवांगी, नितिन, आदेश अविरल, दीपशिखा व स्वधा आदि के स्कूली दिन हैं। परिवार को सजोने में वयोवृद्ध छबिया देवी, शांति और चंद्रावती देवी की विशेष भूमिका है। भोजन घर की महिलाएं मिलजुल कर बना लेती हैं। परिवार के ही शिक्षक योगेंद्र जिज्ञासु कहते हैं  एकल जीवन पद्धति से भारत की प्रतिष्ठा पर ठेस पहुंचा है। गांव और परिवार को बचाना आज के समय की बड़ी चुनौती है।
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