धंधेबाज निजी दुकानदारों को मोटी रकम देकर आसानी से प्राप्त कर रहे खाद
मौका मिलते ही धंधेबाज खाद को कर दे रहे सरहद पार, किसान परेशान
महराजगंज। नेपाल में खाद की तस्करी होने से सबसे अधिक परेशानी किसानों को ही होती है। हर बार की तरह इस बार भी किसानों ने जैसे-तैसे खाद लेकर बोवाई की। भारतीय क्षेत्र में किसानों को खाद के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं तस्कर निजी दुकानों से सांठ-गांठ बनाकर अपना धंधा चमका रहे हैं। तस्करी के खेल में धंधेबाजों को मोटा मुनाफा हो रहा है।
खाद की परेशानी न हो, इसे देखते हुए समितियों पर खाद उपलब्ध कराते हुए टोकन के साथ ही रोस्टर बनाकर खाद वितरण कराया गया। इससे किसानों की समस्या काफी हद तक दूर हो गई। लेकिन जिले में जगह-जगह खाद की निजी दुकानें खुली हैं। निजी दुकानों से भी किसानों को खाद दिए जाने की व्यवस्था है। इससे किसानों को घर के नजदीक ही खाद मिल जाती लेकिन मोटे लाभ के चक्कर में खेल कर दिया जाता है। इससे सारा दबाव समितियों पर आ जाता है। किसानों को कई दिन चक्कर लगाने के बाद खाद मिलती है। अब तो इस समय जिले में खाद की समस्या नहीं है। क्योंकि खेतों की बुवाई हो चुकी है। सिंचाई होने के बाद यूरिया की जरूरत पड़ेगी। इसके पहले ही तस्कर अपना धंधा तेज करने में लगे हैं। सूत्रों की मानें तो तस्कर नियम कानून का ध्यान रखते हुए जरूरी प्रपत्रों को देकर प्राइवेट दुकानों से खाद हासिल कर ले रहे हैं। इसे मौका देखकर सरहद पार कर देते हैं। इन दिनों खाद की बरामदगी भी हो रही है। भारत में यूरिया 266.50 व डीएपी 1,350 रुपये में मिल रही हैं जबकि नेपाल में यूरिया 550 व डीएपी 1,600 में मिल रही है। प्रति बोरी यूरिया पर तस्करों को लगभग 234 रुपये का फायदा मिल रहा है। नेपाल में इसका कोई निर्धारित रेट नहीं है। सीमा क्षेत्र में अंदर जितनी दूरी पर खाद पहुंचती है, रेट उतना ही अधिक मिलता है।
नेपाल में मांग के अनुसार भारतीय क्षेत्र से तस्कर सामान सरहद पार करते हैं। इन दिनों खाद की मांग नेपाल में अधिक है। यही वजह है कि तस्कर इसे सरहद पार करने में जुटे हैं। तस्करी के इस खेल में सिर्फ कैरियर ही पकड़े जा रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि भारत-नेपाल सरहद पर खाद तस्करी का धंधा कोई नया नहीं है। क्योंकि यह धंधा दशकों से खरीफ और रबी फसल के दौरान देखने को मिलता है। बताया जा रहा है कि धंधेबाजों को अब सरकारी समितियों से खाद लेना काफी मुश्किल हो चुका है। क्योंकि संबंधित सरकारी समितियों से खाद लेने के लिए वहां के पंजीकृत किसानों का पासबुक दिखाना पड़ रहा है। समिति के जिम्मेदारों की ओर से किसानों की भूमि दर्ज के मुताबिक ही खाद देकर खाद वितरण दर्ज किया जा रहा है। वहीं निजी खाद के दुकानों पर असल किसानों के लिए दुकानदारों की ओर से काफी नियम कानून बताए जाते हैं। जबकि धंधेबाजों को आसानी से खाद मिल जाती है।
अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि कड़ी निगरानी के कारण बरामदगी होती है। समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
सरहद के इन नाकों से होती है तस्करी
नेपाल सीमा से सटे सोनौली कस्बा, दो नंबर गली, शेख फरेंदा, तिलहवा, सुंडी, खनुआ, भगवानपुर, श्यामकाट, अशोगवा, कनरी-चकरार, झिगटी, शिवतरी, पहाड़ी टोला, रेहरा-अहिरौली, पैसियां नाकों से खाद की तस्करी होती है। रोकथाम के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। फिर भी तस्कर अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। हालांकि इन दिनों लगातार खाद की बरामदगी हो रही है।
पगडंडी से चार बोरी यूरिया खाद बरामद
खनुआ। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर के पास से पुलिस ने यूरिया खाद बरामद कर अग्रिम कार्रवाई हेतु नौतनवा कस्टम को सौंप दिया है। सोनौली थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर भगवानपुर गांव के पास यूरिया खाद एकत्रित होने की सूचना मिली थी मौके पर पुलिस पहुंची तो देखा की चार बोरी लावारिस यूरिया है। इसे नौतनवा कस्टम को सौंप दिया गया। संवाद
सीमावर्ती क्षेत्र में बरामदगी एक नजर में:
-19 नवंबर को कोल्हुई पुलिस ने जोगियाबारी के पास से मिनी ट्रक पर लदी 100 बोरी यूरिया बरामद।
-25 नवंबर को नौतनवां पुलिस ने खैराटी तिराहे के पास से चार बोरी यूरिया बरामद की।
-29 नवंबर को सशस्त्र सीमा बल 66 वीं वाहिनी के बीओपी सुंडी के जवानों ने पांच बोरी यूरिया बरामद की।
-10 दिसंबर को नौतनवां पुलिस ने 07 बोरी यूरिया, 02 साइकिल बरामद की।
-11 दिसंबर काे सोनौली पुलिस टीम ने 07 बोरी यूरिया, ठूठीबारी पुलिस चार बोरी और परसामलिक पुलिस टीम ने तीन बोरी यूरिया बरामद की।
-12 दिसंबर को नौतनवा पुलिस टीम ने डंडा नदी के पास 60 बोरी यूरिया खाद बरामद की।