संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भारत एक प्राचीन भूमि है। इसकी महानता के बारे में जितना कहा जाए कम है। यहां का उचित वातावरण मनुष्य को जीने का बेहतर मौका ही नहीं देता, बल्कि एक सही सोच भी विकसित कराता है। भारत के लोग प्राचीनकाल से ही कबीलों में रहे हैं, जिससे उनमें एक सामुदायिक भावना का विकास बहुत पहले ही हो गया था। उन्होंने सभ्य होने के तरीके अन्य दुनिया की अपेक्षा पहले ही ढूंढ लिए थे।
ये बातें महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित सप्त दिवसीय व्याख्यान माला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि हेमवती नंदन बहुगुणा, चिकित्सा सेवा विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति प्राे. मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने कहीं।
उन्होंने कहा कि सिंधु, सरस्वती और ब्रह्मपुत्र जैसी विशालकाय नदियों के होने के कारण भारत प्राचीन सभ्यताओं और मानवों के रहने का मूल स्थान माना गया है। विश्व का प्रथम धार्मिक ग्रंथ ऋग्वेद यहीं पर रचा गया। ऋग्वेद से ही दुनिया के सभी धर्मों ने सूत्र लिए और एक नए धर्म का सूत्रपात किया।
व्याख्यान-माला के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्राणि विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं आचार्य प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत के सिद्ध पुरुष जैसे दुनिया के अन्य किसी देश में सिद्ध पुरूष नहीं है, क्योंकि भारत में आकर ही लोगों को ज्ञान और मोक्ष का मार्ग नजर आता है। जब हम भारत की बात करते हैं तो इसका मतलब है अखंड भारत। लोगों को यहीं पर आकर शांति और ज्ञान का अनुभव होता है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर क्रीड़ा विभाग की ओर से संकल्प दिवस मनाया गया। इस अवसर पर भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार चौधरी ने कहा कि खेल व व्यायाम मानव जीवन की अमूल्य निधि है। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।