नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। स्कूलों की फीस और किताबों के दाम बढ़ने से अभिभावकों का बजट गड़बड़ाया हुआ है। ऐसे में बढ़े कॉपी-किताबों के दामों में एक बड़ा गोलमाल पकड़ में आ रहा है। किताबों के विक्रेता पिछले साल की किताबों को इस नए सत्र में खपाने के लिए काले स्टिकर (चिप्पड़) लगाकर उसपर दाम बढ़ाकर लिख दे रहे हैं।
इस सत्र में बेची जा रहीं किताबों की जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि स्कूलों में लगने वाली निजी पब्लिकेशन की किताबों के दामों में हेराफेरी करके अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। सीबीएसई में लगने वाली सरस्वती प्रकाशन की कक्षा सात की भूगोल, इतिहास, कंप्यूटर की किताबों मेें असल दाम से की गई छेड़छाड़ का मामला पड़ताल में सामने आया है।
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कंप्यूटर की किताब की असली कीमत 70 रुपये है। इस असली कीमत को छिपाकर अभिभावकों से 85 रुपये वसूले जा रहे हैं। ऐसे ही इतिहास की किताब का दाम 70 रुपये के बजाय 80 रुपये, भूगोल की किताब का दाम 75 रुपये के स्थान पर 95 रुपये वसूला जा रहा है।
अभिभावकों को छले जाने का खेल जारी
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि इस सत्र में पहले तो फीस बढ़ा दी गई, उसके बाद इस तरह की हेराफेरी के मामले सामने आ रहे हैं। पढ़ाई को कमाई का जरिया बनाकर अभिभावकों को लूटा व उनके साथ छल किया जा रहा है। इस तरह की गतिविधि करने वाले बुक विक्रेताओं पर शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।