गोरखपुर में चेकिंग के दौरान व्यापारी से 50 लाख रुपये छीनने के मामले में आयकर जांच भी तेज हो गई है। व्यापारी नवीन श्रीवास्तव ने बीते 26 अप्रैल को आयकर विभाग में प्रस्तुत होकर बताया है कि ये रुपये हवाला के नहीं, बल्कि उनके ही थे।
यह रकम उन्हहोंने पत्नी के गहने बेचकर और व्यापारियों से उधार लेकर जुटाई थी। रकम पत्नी के इलाज के लिए जुटाई गई थी। अब आयकर विभाग इस बयान के प्रमाणों की सत्यता जांचेगा, तभी यह तय होगा कि रकम जब्त की जाएगी या छोड़ दी जाएगी।
इस मामले में आरोपी दरोगा आलोक सिंह जेल में हैं। उसके तीन साथी फरार हैं। वादी नवीन श्रीवास्तव केस दर्ज कराने के बाद अचानक से लापता हो गए थे। बीते तीन अप्रैल को घटना के बाद से ही रकम को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही थी।
पुलिस ने दरोगा और साथी प्रिंस को जेल भिजवाने के बाद अन्य साथियों की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच रकम को हवाला का बताया जाने लगा। ऐसे में आयकर विभाग भी सक्रिय हो गया। वादी के घर पर जाकर शमन चस्पा करने के साथ उनसे संपर्क का प्रयास किया जा रहा था।
रकम अपनी बताई, लेकिन उलझनें बरकरार
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि नवीन श्रीवास्तव ने इन रुपयों को अपना तो बता दिया, लेकिन उलझा भी दिया। जैसे, खुद के व्यापार के कितने रुपये थे, कितने उधार लिए, पत्नी के गहने कहां बेचे, इसका सीधा जवाब नहीं दिया।
सूत्रों ने बताया कि आभूषण बेचने वाले बात पर पलटते हुए बताया कि पत्नी ने इन्हें बेचा था। ऐसे में दुकानदार कौन था, इसकी जानकारी नहीं है।आयकर विभाग, वादी और दरोगा के बयान की मिलान कर जांच को आगे बढ़ा सकता है।