अव्यवस्था के बीच दो दिनों में 35 हजार महिलाओं ने रोडवेज की बसों से निशुल्क सफर किया। पहले दिन बृहस्पतिवार को 18 हजार और शुक्रवार को कुल 17 हजार महिलाओं को रोडवेज ने निशुल्क उनके गंतव्यों तक पहुंचाया।
प्रदेश सरकार ने रक्षाबंधन पर दो दिनों तक रोडवेज बसों में महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा की घोषणा की थी। बृहस्पतिवार को गोरखपुर परिक्षेत्र में 17 हजार महिलाओं ने सफर किया। दूसरे दिन भी बस स्टेशन पर महिलाओं की भारी भीड़ रही। सुबह पांच बजे से बस स्टेशन पर महिलाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सुबह तो पर्याप्त संख्या में बसें मिलीं, लेकिन जैसे-जैस समय बीता, बसों की कमी होती गई।
कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, महराजगंज, सिद्धार्थनगर के अलावा लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ आदि जगहों का महिलाओं ने रोडवेज बसों से सफर किया। कोरोना के कारण पिछले साल बहुत ही कम महिलाओं ने बस से निशुल्क यात्रा की थी, लेकिन इस साल पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए।
भीड़ के कारण महिलाओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। हजारों की संख्या में महिलाएं बसें नहीं मिलने के कारण दूसरे साधनों से अपने गंतव्यों तक गईं।
लोकल रूटों पर हुई ज्यादा परेशानी
रोडवेज प्रशासन ने इस वर्ष रक्षाबंधन पर अतिरिक्त बसें नहीं चलाते हुए दावा किया था कि पूरी क्षमता के साथ रक्षाबंधन पर बसों का संचालन किया जाएगा। लेकिन, उनके दावों की पोल खुल गई। रोडवेज की बदइंतजामी के कारण महिलाएं बसों की तलाश में दिनभर भटकती नजर आईं। सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को लोकल रूटों पर उठानी पड़ी। वहीं लंबी दूरी की बसें खाली गईं।
खड़ी रहीं दर्जनों बसें
परिवहन निगम ने रोडवेज के चालक और परिचालक की छुट्टियां रद्द करते हुए उनके लिए प्रोत्साहन राशि की घोषणा की थी, बावजूद इसके रक्षाबंधन के लिए दर्जनों चालक और परिचालक बिना बताए ड्यूटी पर नहीं आए, ऐसे में दर्जनों बसें कार्यशाला में ही खड़ी रहीं। आरएम पीके तिवारी ने बिना बताए छुट्टी पर गए सभी चालकों और परिचालकों की रिपोर्ट मांगी है।
सुबह ही बस से निशुल्क यात्रा करने के लिए बस स्टेशन आई थी, लेकिन दो घंटे लखनऊ की बस के लिए इंतजार करना पड़ा। दो घंटे बाद बस मिली है, वह भी पूरी भरी हुई है। ऐसे में खड़े होकर सफर करना पड़ेगा।
निहारिका
रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह से फेल है। बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा, बस स्टेशन पर बैठने तक की व्यवस्था नहीं थी। पूछताछ काउंटर पर भी कोई जानकारी देने वाला नहीं है। बहुत मुश्किल से बस में चढ़ सकी हूं।
रजनी पांडेय