- अलग-अलग नियुक्तियां होने से उपचार में मिलेगी सहूलियत
- मरीजों को इमरजेंसी में होती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नए साल में एम्स में आने वाले मरीजों को और बेहतर चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इमरजेंसी में अक्सर डॉक्टरों की व्यस्तता की वजह से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बेड खाली होने पर उन्हें डॉक्टरों की कमी का सामना करना पड़ता है। एम्स प्रबंधन ने सिर्फ इमरजेंसी के लिए 10 सीनियर रेजिडेंट शामिल करने का फैसला लिया है। इनके साथ ही 55 सीनियर रेजिडेंट और 69 कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।
एम्स प्रबंधन ने बताया कि इन सारी भर्तियों में ऑनलाइन प्रक्रिया होगी। सीधे वॉक-इन इंटरव्यू के आधार पर चयन किया जाएगा। यानी योग्य अभ्यर्थी तय तारीख पर दस्तावेज के साथ पहुंचकर सीधे साक्षात्कार दे सकेंगे। इस भर्ती में ऐनेस्थीसिया और सीनियर रेजिडेंट पद के लिए उम्मीदवार के पास एनएमसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से एमडी, एमएस या डीएनबी की डिग्री अनिवार्य है।
इसके अलावा ट्रॉमा, इमरजेंसी, ऐनेस्थीसिया, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी या ऑर्थोपेडिक्स जैसी संबंधित शाखाओं की डिग्री मान्य होगी। इसके अलावा सबसे खास बात है कि सभी जेआर और एसआर की नियुक्ति के इंटरव्यू में मेडिकल काउंसिल (एनएमसी/एमसीआई/राज्य) में पंजीकरण का प्रमाणपत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। एम्स प्रशासन ने चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के साथ ही कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिया है। खून व पेशाब से जुड़ी जांच खुद करने के लिए एक साथ 40 जूनियर मेडिकल लैब टेक्नोलाजिस्ट (जेएमएलटी) की नियुक्ति होने जा रही है।
एम्स ने अब लैब की सेवा निजी पैथ से हटाकर खुद कर ली है। इसमें दो सौ रुपये तक की जांच निशुल्क की गई है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को मरीजों तक बढ़ाने में इनकी संख्या की कमी भी एक दिक्कत बनी रहती है। नए साल में 40 जूनियर मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर चिकित्सकीय सेवा के साथ परीक्षण सेवा भी प्रभावी कर दी जाएगी। अगले सत्र की शुरूआत के पहले इनके नियुक्ति का प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।