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सेहत को झटका : होली की खरीदारी में रहें सावधान...बाजार में नकली सरसों के तेल की भरमार

Tue, 24 Feb 2026 05:02 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

सरसों के तेल का मंडल में प्रतिदिन का तीन करोड़ का कारेाबार होता है। जबकि होली में यह बढ़कर पांच करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। साहबगंज मंडी के सूत्रों के अनुसार, हार्बर्ट बंधे के पास मिलावट का खेल होता है। मिलावटखोर 80 से 110 रुपये प्रति लीटर की दर से नेपाल से पाम ऑयल मंगाते हैं और केमिकल युक्त पीला रंग मिलाकर सरसों जैसा रंग तैयार करते हैं।
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हावर्ट बंधे के पास तेल का डब्बा खाली करते लोग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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होली के लिए खरीदारी करने की तैयारी कर रहे हैं तो सावधान रहने की जरूरत है। वजह यह है कि बाजार में नकली सरसों तेल की भरमार है। धंधेबाज सस्ते पाम ऑयल में केमिकल और एसेंस मिलाकर नकली सरसों तेल बना रहे हैं। हार्बर्ट बंधे के पास यह धंधेबाजी खूब हो रही है।
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डॉक्टरों के मुताबिक, इस नकली तेल के इस्तेमाल से न सिर्फ पाचन तंत्र पर असर पड़ेगा बल्कि किडनी और लिवर भी खराब हो सकता है। चिप्स, पापड़ और कचरी आदि को तैयार करन में सरसों तेल का इस्तेमाल किया जाता है। धंधेबाज इसी को अवसर के रूप में देख रहे हैं। 

सस्ते पाम ऑयल में प्रतिबंधित सिंथेटिक ‘बटर येलो’ रंग और कृत्रिम एसेंस मिलाकर धंधेबाज सरसों तेल बना दे रहे हैं। शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिलावटी सरसों तेल का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। यही नहीं, तैयार माल को देवरिया समेत आसपास के जिलों में भी सप्लाई किया जा रहा है।

सरसों के तेल का मंडल में प्रतिदिन का तीन करोड़ का कारेाबार होता है। जबकि होली में यह बढ़कर पांच करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। साहबगंज मंडी के सूत्रों के अनुसार, हार्बर्ट बंधे के पास मिलावट का खेल होता है। मिलावटखोर 80 से 110 रुपये प्रति लीटर की दर से नेपाल से पाम ऑयल मंगाते हैं और केमिकल युक्त पीला रंग मिलाकर सरसों जैसा रंग तैयार करते हैं।

गंध के लिए कृत्रिम एसेंस डाला जाता है। इसके बाद तेल को टीन और प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर नामी कंपनियों जैसे स्टीकर लगाकर पैक किया जाता है। फुटकर बाजार में यही तेल 170 से 190 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गोरखपुर मंडल में प्रतिदिन लगभग तीन करोड़ रुपये के सरसों तेल का कारोबार होता है।

होली जैसे बड़े त्योहार पर मांग बढ़ने से यह आंकड़ा 50 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। त्योहार के दौरान पकवान, नमकीन और मिठाइयों की अधिक खपत के कारण तेल की मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग की पहले हुई जांच में कई नमूनों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। बटर येलो रंग प्रतिबंधित श्रेणी में आता है और लंबे समय तक सेवन से यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। शुद्ध सरसों के तेल विक्रेता पवन सिंघानियां कहते हैं-खुले और लोकल ब्रांड के तेल में मिलावट की शिकायतें सबसे ज्यादा मिल रही हैं।

मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे लोगों के चलते अच्छे कारोबारी भी संदेह के घेरे में आ जाते हैं।
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सेहत पर पड़ सकता है गंभीर प्रभाव
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर दुर्गेश कुमार ने बताया कि सिंथेटिक रंग और रसायन मिले तेल का नियमित सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं, एलर्जी और त्वचा रोग भी हो सकते हैं।

ऐसे करें असली-नकली की पहचान
जिला अस्पताल के डाॅक्टर नेहा कपूर के अनुसार, सरसों तेल को कुछ समय के लिए फ्रिज में रखने पर यदि वह आंशिक रूप से जमने लगे तो उसमें पाम ऑयल की मिलावट की आशंका हो सकती है। शुद्ध सरसों तेल सामान्यतः पूरी तरह नहीं जमता और उसकी गंध प्राकृतिक और आंखों में हल्की जलन पैदा करने वाली होती है।

मिलावट को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने साहबगंज मंडी में जांच की थी और नमूने लिए गए। तेल में मिलावट को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर इसमें कार्रवाई की जाएगी: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
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