गोला बाजार स्थित भारत फाइनेंसियल इन्क्लूजन लिमिटेड सब्सिडीयरी इंडसइंड बैंक की शाखा से ऋण लेने वाली चार महिलाओं की करतूत से हर कोई हैरान है। ऋण जमा न करना पड़े, इसके लिए इन महिलाओं ने अपने पतियों को मृतक बताते हुए उनका मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करा दिया। इससे इनका ऋण तो माफ हुआ ही, साथ ही पूर्व में जमा की गई किस्तों को डेथ पे अमाउंट के रूप में वापस ले लिया गया।
बैंक की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच की तो चारों महिलाओं के पति जीवित मिले। रविवार को इन चारों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। इस मामले में ऋण लेने वाली कुछ और महिलाओं की भी जांच चल रही है। चर्चा है कि पूर्व शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से करीब साढ़े छह लाख रुपये का घपला किया गया है।
भारत फाइनेंसियल इंक्लूजन लिमिटेड सब्सिडियरी इंडसइंड बैंक ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में महिलाओं का समूह बनाकर स्वरोजगार एवं आय सृजन के लिए ऋण देता है। फिर उसे आसान किस्तों में संग्रह करता है। इस शाखा के प्रबंधक दिनेश कुमार ने अक्तूबर 2023 में अपने ही शाखा के पूर्व प्रबंधक बृजेश कुमार सरोज व उनके पिता रामबली, निवासी कटुई विजया, थाना बिलरियागंज, जनपद आजमगढ़ के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
तहरीर में कहा गया कि आरोपियों ने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए समूह की कई महिला सदस्यों के पति को मृत दिखाकर उनके बीमा की रकम खुद हड़प ली है। कुछ महिला सदस्यों का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर उनका भी धन स्वयं ले लिया है। इसके अलावा पूर्व में भी इन्हीं सदस्यों को ऋण बांटने का दावा करते हुए ऋण का पैसा खुद दे लिया।
पुलिस ने जांच शुरू की, तब पता लगा कि फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर 644197 रुपये का गबन किया गया है।
इसके बाद पुलिस ने रविवार को गोला नगर पंचायत वार्ड संख्या आठ बड़ी मस्जिद निवासी इस्लाम की पत्नी आशिया उर्फ आशा, वार्ड संख्या 21 मछलीहट्टा निवासी नीरज जायसवाल की पत्नी राजकुमारी देवी, सुअरज गांव निवासी विनय कुमार मौर्य की पत्नी साधना व डेईडीहा गांव निवासी गौरीशंकर प्रजापति की पत्नी मोती देवी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच में सभी के पति जीवित मिले।
कुछ और नाम
ऋण माफी के लिए पतियों को मृतक बनाने के इस खेल में केवल ग्रामीण क्षेत्र की ये महिलाएं ही नहीं, बल्कि बैंक में वरिष्ठ पदों पर बैठे कई अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच अधिकारी ने बताया कि किस्त जमा करने के दौरान पति की मौत और फिर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर उसे जमा करना और बदले में ऋण माफ करा लेना एक दिन का खेल नहीं है।
न ही इसे केवल ग्रामीण क्षेत्र की कुछ महिलाएं ही कर सकती हैं। संभव है कि इसके पीछे पूरा एक नेटवर्क काम कर रहा हो। असलियत सामने लाने के लिए पुलिस को पूरे नेटवर्क को सामने लाना होगा। कोतवाल वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस मामले में ऋण तो जमा नहीं ही किया गया, फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर मृत्यु दावा राशि को भी हड़प लिया गया। कुछ और नाम भी जांच में पता लगे हैं, जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
ऋण माफी के नाम पर पहले भी हो चुकी हैं गड़बड़ियां
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को समूह बनाकर रोजगार करने के नाम पर खूब छला गया है। ग्रामीण क्षेत्र में सक्रिय कई निजी बैंकिंग कंपनियां पहले महिलाओं को सस्ते दर पर बिना किसी लिखा-पढ़ी के लोन दिलाती हैं और फिर उनके एजेंट हर दिन ब्याज के आधार पर वसूली शुरू कर देते हैं।
पता लगता है कि महिला ने जितना ऋण लिया था, उससे कई गुना रकम भरने के बाद भी मूलधन जस का तस है। परेशान महिलाओं को पिछले साल अगस्त में ऋण माफी के नाम पर भी छला गया। कुछ लोगों ने महराजगंज जिले की महिलाओं को ऋण माफी का झूठा प्रलोभन देकर गोरखपुर तक बुलाया था। हालांकि, बाद में सचाई पता लगने पर महिलाएं लौट गई थीं। वहीं देवरिया में एक महिला ने इसी तरह से कर्ज के जाल में फंसकर आत्महत्या कर ली थी।
जांच में चार महिलाओं के पति जीवित मिले। गोला पुलिस ने फर्जीवाड़ा के आरोप में चारों महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया है। इस मामले में अभी और भी लोगों के नाम सामने आए हैं, जिसकी जांच चल रही है:
जितेंद्र कुमार, एसपी दक्षिणी