गोरखपुर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल के तीन अल्ट्रासाउंड केंद्र में सिर्फ एक महिला डॉक्टर की तैनाती है। एम्स में महिलाओं को जांच की तारीख ही महीने भर बाद मिलती है। पिछले दिनों जिला महिला अस्पताल में कर्मचारी ने महिला के साथ छेड़खानी कर दी थी।
जिला महिला अस्पताल में महिलाओं की अल्ट्रसाउंड जांच पुरुष डॉक्टर और स्टाफ करते हैं। इसे लेकर महिलाएं आपत्ति भी जताती हैं। अल्ट्रासाउंड कक्ष में महिला के साथ हुई छेड़खानी का मामला सामने आने के बाद शनिवार को जांच कराने आईं महिलाएं डरी-सहमी दिखीं। उनका कहना था कि जांच के लिए महिलाकर्मी की ड्यूटी होनी चाहिए।
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महिला अस्पताल में तीन जगह अल्ट्रासाउंड होता है लेकिन बस एक ही महिला डॉक्टर हैं और रोजाना 200 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड जांच होती है। यहां पुरुष डॉक्टर और सहायक कर्मचारी की ड्यूटी होती है। इसे लेकर महिलाएं आपत्ति भी जताती हैं लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि जिस कर्मचारी पर छेड़खानी का आरोप लगने के बाद जांच कराई जा रही है उस पर पहले भी इस तरह के आरोप लग चुके हैं लेकिन शिकायतें आगे नहीं बढ़ने से कार्रवाई नहीं हुई।
शनिवार को दोपहर 12:30 बजे जांच कराने आई रानीडीहा की रिंकी ने बताया कि पुरुष स्टॉफ से अल्ट्रासाउंड करवाने में असहज महसूस होता है लेकिन अस्पताल में बस एक ही डॉक्टर हैं। मजबूरी में जांच करानी पड़ रही है। इसी तरह खजनी की रोशनी ने भी बताया कि अल्ट्रासाउंड कक्ष में हुई घटना की जानकारी के बाद जांच करवाने में डर लग रहा था लेकिन मजबूरी में करवाना पड़ा है।
एम्स में महिला कर्मचारी करती हैं जांच पर डेट मिलना मुश्किल
एम्स में डॉक्टर को दिखाना जितना आसान है, जांच करवाना उससे कहीं ज्यादा मुश्किल हो रहा है। डॉक्टर मरीज को देखने के बाद जांच के लिए लिख तो दे रहे हैं। कुछ जांच के लिए मरीजों को एक-दो दिन के अंदर नंबर मिल जाता है लेकिन कुछ जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
जांच तो महिलाएं करती हैं लेकिन डेट लगभग एक महीने बाद का मिलता है। मरीजों ने बताया कि जांच अच्छे से होती है लेकिन डेट मिलने में मुश्किल की वजह से जिला अस्पताल या निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
जिला महिला अस्पताल में छेड़खानी का आरोपी कर्मचारी सस्पेंड
जिला महिला अस्पताल में महिला से छेड़खानी के आरोपी कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही जांच टीम ने पीड़ित महिला और आरोपी कर्मचारी को बयान दर्ज कराने के लिए सोमवार को बुलाया है। वहीं, व्यवस्था में सुधार करते हुए तय किया गया है कि जहां भी महिलाओं की जांच की जाएगी, वहां एक महिला कर्मचारी और गार्ड की ड्यूटी लगाई जाएगी।
आरोप था कि अल्ट्रासाउंड कक्ष में जांच के नाम पर कर्मचारी ने महिला मरीज के कपड़े उतरवाए और अश्लील हरकतें की। विरोध पर जान से मारने की धमकी भी दी। इस मामले की जांच के लिए गठित टीम में डॉ. एके झा, डॉ. अनीता सिंह और डॉ. प्रियंका सिंह शामिल हैं। जांच टीम के अध्यक्ष डॉ. एके झा ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है।
सोमवार को दोनों पक्षों को बुलाया गया है। जल्दी ही इसकी रिपोर्ट दे दी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। एसआईसी डॉ. जय कुमार ने बताया कि अब जहां भी महिलाओं की जांच होगी, वहां एक महिला कर्मचारी और और गार्ड की तैनाती की जाएगी।