इलाके के कराहकोल पुल से रविवार की देर रात 10 बजे पति से नाराज एक महिला ने राप्ती नदी में छलांग लगा दी। राहगीरों की सूचना पर पुलिस और एसडीआरएफ टीम वहां पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी थी, तभी वह महिला खुद ही तैरते हुए नदी के किनारे आ गई। इसे देखकर सभी लोग चौंक गए।
महिला बोली कि बच्चों की याद आई, इसलिए मरने का इरादा छोड़कर तैरकर बाहर आ गई। गगहा पुलिस के मुताबिक, गजपुर की महिमा साहनी ने रविवार रात कराहकोल पुल से राप्ती नदी में छलांग लगाई थी। कूदते देख राहगीरों ने डायल 112 पर कॉल कर सूचना दी।
एसडीआरएफ की टीम ने कराहकोल पुल के नीचे राप्ती नदी में रात करीब 11 बजे पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। तब तक 11:30 बजे महिमा खुद ही तैर कर वापस आ गई। महिमा ने पुलिस से पूछताछ में बताया कि घर पर पति से झगड़ा हो गया था, नाराज होकर आत्महत्या करने आई थी। राप्ती नदी में कूदने के बाद परिवार व बच्चों की याद आने लगी, इसलिए तैरकर बाहर आई। महिमा ने बताया कि वह मछुआरे परिवार से है, इसलिए उसे बचपन से ही तैरना आता है।
पति से फोन पर बात कर नाराज हुई थी महिला
महिमा ने गगहा पुलिस को बताया कि वर्ष 2019 में लालधर साहनी से उसकी शादी हुई थी। शादी के बाद तीन छोटे बच्चे हैं। पति बंगलुरू की एक कंपनी में काम करता है। केवल त्योहार में वह घर पर आता है। इधर, आखिरी बार वह दिवाली में आया था। होली में भी घर नहीं आया। इसके बाद उनके साथ बंगलुरू में रहने के लिए जिद की।
उन्होंने कहा कि बहुत जल्द आकर ले जाउंगा। लेकिन वह नहीं आए। रविवार की रात में इसी बात को लेकर फोन पर पति से कहासुनी हुई। तीनों बच्चों को घर में छोड़कर आत्महत्या करने निकल गई। राप्ती नदी में कूदने के बाद बच्चों की याद सताने लगी। तब आत्महत्या करने का इरादा बदल कर नदी किनारे आकर बैठ गई।
करीब एक घंटे बाद पुलिस वहां ढूंढना शुरू की तो वह खुद उनके सामने आ गई। पुलिस को पूरा मामला समझ में आया तो महिला के पति लालधर को कॉल करके बात की। पति ने पुलिस को बताया कि वह महिमा को समझा ही रहा था, लेकिन वह नाराज होकर फोन काट दी। लगा अभी थोड़ी देर में गुस्सा शांत हो जाएगा, लेकिन उसने तो आत्मघाती कदम उठा लिया। पति ने पुलिस से कहा कि बहुत जल्द आकर परिवार को अपने पास बंगलुरू ले जाउंगा।
इस संबंध में गगहा थाना प्रभारी सुशील कुमार चौरसिया का कहना है कि महिला नदी में कूद गई थी, खुद ही तैरकर वापस भी आ गई। वह पति से नाराज थी, उसे समझा-बुझाकर परिजनों को सौंप दिया गया।