बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कैंपस में निजी एंबुलेंस के आने पर पूरी तरह से रोक है। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन लिखा पढ़ी में एडीजी तक से शिकायत कर चुका है, लेकिन इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रहा है। यही कारण है कि एंबुलेंस चालक नियमों को दरकिनार कर मरीजों को सेटिंग के बल पर निजी अस्पतालों में बेखौफ पहुंचा रहे हैं।
इस खेल में बीआरडी के वार्ड ब्वॉय, स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ डॉक्टरों की भूमिका भी संदिग्ध है। क्योंकि, उनका भी बीआरडी के आसपास निजी अस्पताल चल रहा है।
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बिहार के मरीज निशाने पर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बिहार के मरीज इलाज के लिए सबसे अधिक आते हैं। यहीं मरीज एंबुलेंस चालकों और कॉलेज के स्वास्थ्यकर्मियों के निशाने पर रहते हैं। स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को बेहतर कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने का हवाला देकर एंबुलेंस कर्मियों की मिलीभगत से सेटिंग वाले निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं। सोमवार को ट्रॉमा सेंटर से एक मरीज को एक एंबुलेंस चालक बातचीत करके एक निजी अस्पताल भी ले गया। वह मरीज के बिहार के चंपारण का रहने वाला था।
तारामंडल का इलाका अवैध अस्पतालों का हब बन गया है। बीआरडी से निजी एंबुलेंस चालक मरीजों को सीधे तारामंडल पहुंचाते हैं, जहां पर पहले से ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी मरीज का इंतजार करते हैं। पिछले दिनों तारामंडल के एक अस्पताल में इस तरह के मामले भी सामने आए थे। जिस पर विभाग ने जांच की थी तो पता चला कि जिस डॉक्टर के नाम पर रजिस्ट्रेशन हैं, वह दिल्ली में रहते हैं। इस पर विभागीय जांच भी चल रही है।
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सरकारी एंबुलेंस का करें इस्तेमाल, मिलेगी निशुल्क
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल लोग करें, वह पूरी तरह से निशुल्क है। 108 एंबुलेंस की सेवा कोई भी ले सकता है। जबकि, गर्भवतियों के लिए 102 नंबर एंबुलेंस है। इसके अलावा अब नई सुविधा के तहत निजी अस्पतालों पर भी सरकारी एंबुलेंस मरीजों को लेने जाएगी। अगर 15 से 20 मिनट के अंदर एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंचती है तो लोग इसकी शिकायत भी कर सकते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार राय ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एक स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वॉय के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जानकारी मिली है। यह बताया जा रहा है कि यह लोग मरीज को एंबुलेंस से निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भेज रहे थे। मामले की जांच बीआरडी भी अपने स्तर से करेगा। अगर स्वास्थ्यकर्मी दोषी मिलते हैं तो उन्हें हटाते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।