कुछ लोगों ने बताया कि मिट्टी के अवैध खनन की सूचना कई बार हल्का लेखपाल को दी गई, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। हद तो यहां तक हो गई कि खनन करने वाले गांव के तालाब और बगीचे तक खनन करके गहरी मिट्टी निकाल रहे हैं।
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बताते चले कि गीडा प्रशासन की ओर से हमेशा से कहा जाता है कि अधिसूचित क्षेत्र में किसी प्रकार का खनन नहीं किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो गीडा के पास कर्मचारियों के कमी के कारण क्षेत्र में अवैध कार्य की जानकारी नहीं हो पाती। इसीलिए अवैध खनन पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की है। अगर क्षेत्र में किए जा रहे खनन को लेकर बड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो, खनन माफिया जल्द ही गीडा क्षेत्र के अधिकांश जमीन को बड़ी झील में तब्दील कर देंगे।
इस संदर्भ में उप जिलाधिकारी कुंवर सचिन सिंह का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी तरह के खनन की अनुमति किसी को नहीं दी गई है। तहसील क्षेत्र में दो से तीन लोगों को नदी के किनारे खनन की अनुमति है, लेकिन किसी भी भट्ठा संचालक की ओर से या प्राइवेट मिट्टी खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
तहसील प्रशासन किसी को भी खेतों से मिट्टी खनन करने के लिए अनुमति नहीं देता। वह स्वयं क्षेत्र में जाकर जांच करेंगे, अगर किसी द्वारा अवैध तरीके से खेत की मिट्टी निकाली गई होगी तो उस पर जुर्माना लगाने के साथ विधिक कार्रवाई की जाएगी।