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आईआईटी बीएचयू और रुड़की ध्वनि प्रदूषण माप के लिए बनाएंगे कैलकुलेटर, इन शहरों में शुरू हुआ डाटा कलेक्शन का काम

Thu, 04 Mar 2021 01:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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इंप्रिंट इंडिया (इंपैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नालॉजी) के निर्देशन में आईआईटी बीएचयू और आईआईटी रुड़की की टीम एक ऐसा कैलकुलेटर बनाएंगे जिससे पता चल सकेगा कि क्षेत्र विशेष में कितने वाहनों से कितना ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर और प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर में वाहनों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का डाटा एकत्रित करने के लिए सर्वे किया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, इंप्रिंट इंडिया के इस प्रोजेक्ट का बजट 33.80 करोड़ है। प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आईआईटी बीचएचयू के प्रो. बृंद कुमार और आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर मनोरंजन परिडा को सौंपी गई है। इनके निर्देशन में टीमें वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर में काम कर रहीं हैं। गोरखपुर में आईआईटी बीएचयू के रिसर्च स्कॉलकर अमरदीप पांडेय के नेतृत्व में राज यादव और अनुज पांडेय ध्वनि प्रदूषण की डाटा संकलित कर रहे हैं।

प्रो. बृंद कुमार ने बताया कि तीन शहरों में ध्वनि प्रदूषण की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद आईआईटी बीएचयू और आईआईटी रुड़की की टीम के साथ मिलकर एक स्मार्ट कैलकुलेटर बनाया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि स्मार्ट सिटी और स्मार्ट टाउनशिप बसाने के दौरान उस क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति कितनी होनी चाहिए।
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ध्वनि प्रदूषण को विदेशों में निजता का उल्लंघन माना गया है

प्रो. बृंद बताते हैं कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर भारत में कोई सख्त कानून नहीं है। ट्रैफिक नियमों के तहत चालान की कार्रवाई तक यह सीमित है। जबकि, विदेशों में ध्वनि प्रदूषण को निजता का उल्लंघन माना गया है। यही वजह है कि विदेशों में जो भी टाउनशिप या फिर स्मार्ट सिटी बनती है तो ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण का विशेष ख्याल रखा जाता है। इस कैलकुलेटर के बन जाने के बाद भारत सरकार स्मार्ट सिटी में इसका इस्तेमाल करेगी। भारत सरकार के निर्देश पर इंप्रिंट इंडिया यह प्रोजेक्ट कर रही है।  
 
इस तरह मापेंगे ध्वनि प्रदूषण
प्रो. बृंद ने बताया कि यह स्मार्ट कैलकुलेटर होगा। इसमें चार पहिया और दोपहिया वाहनों की संख्या डालते ही यह बता देगा कि इस एरिया में ध्वनि प्रदूषण कितना हो रहा है। साथ ही क्षेत्र में कंपन की स्थिति का भी पता लग जाएगा। क्योंकि गाड़ियों के चलने से कंपन होता रहता है, जो लोगों को नजर नहीं आता, लेकिन एक तरह का यह भी प्रदूषण ही है।
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