नए हाईवे और रिंग रोड से बढ़ा शहर का दायरा, कालेसर से जगदीशपुर तक सब गोरक्षनगरी
कालेसर में गीडा ला रही आवासीय योजना, बाघागाड़ा तक लोग खुद बना रहे आशियाना
कालेसर से जंगल कौड़िया के बीच बाईपास पर 300 फिट तक बनेगा हाईवे फैसेलिटी जोन
जंगल कौड़िया से पिपराइच के बीच कई बिल्डर ला रहे हैं आवासीय योजनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कभी गोलघर के आगे पैडलेगंज और मोहद्दीपुर चौराहे तक आते-आते शहर निपट जाता था। आगे बढ़ते ही लोग जंगल, गड्ढे, तालाब बताते थे। इधर कुछ ही वर्षों में तेजी से हुए विकास ने गोरक्षनगरी की रंगत ही बदल डाली। तीन नए हाईवे और रिंग रोड बनने से शहर का दायरा अब कालेसर से लेकर जगदीशपुर तक पहुंच गया है। कालेसर से जगदीशपुर तक बाईपास के किनारे जगह-जगह नई काॅलोनियों के लिए बिल्डर जमीनें खरीद रहे हैं। इसे देखकर लगता है कि कुछ ही वर्षों में कालेसर और जगदीशपुर तक पैर रखने की जगह नहीं होगी।
कालेसर जीरो प्वाइंट पर खुद गीडा प्रशासन ने करीब 350 प्लॉट की आवासीय काॅलोनी समेत फ्लैट बनाने का भी निर्णय लिया है। कालेसर से जंगल कौड़िया तक बने नए बाईपास के किनारे जीडीए भी आने वाले समय में एक और नया गोरखपुर बसाने की तैयारी में है। जंगल कौड़िया से पिपराइच तक बनी नई सड़क के दोनों तरफ की जमीनें भी बिल्डरों ने खरीद ली है। अब केवल पिपराइच से जगदीशपुर के बीच बनने वाली सड़क के किनारे की ही जमीनें खाली हैं।
वर्ष 2017 के बाद से शहर के विकास को पंख लग गए हैं। पहले शहर के अंदर की सड़कों का चौड़ीकरण शुरू हुआ, इसके बाद चारों तरफ से रिंग रोड का प्रस्ताव रखा गया। गोरखपुर-मुजफ्फरपुर हाईवे पर पहले से ही जगदीशपुर से कालेसर तक बाईपास सड़क थी। इसके बाद कालेसर से जंगल कौड़िया तक दूसरा बाईपास बना। फिर जंगल कौड़िया से पिपराइच होते हुए जगदीशपुर तक तीसरा बाईपास मंजूर हुआ, जिस पर मिट्टी भराई व जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। इससे शहर के चारों तरफ रिंग रोड वजूद में आ गया।
इस रिंग रोड ने गोरखपुर के क्षेत्रफल का तेजी से विकास कराया। शहर के अंदर के लोग भी चौड़ी सड़कों के किनारे नई जमीन खरीदकर घर बनाने लगे। वहीं पड़ोसी जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग बेहतर माहौल की उम्मीद में गोरखपुर आकर जमीन व मकान खरीद रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि जमीनों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।
महायोजना में जीडीए ने शामिल किए हैं 320 गांव
शहर का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, गोरखपुर विकास प्राधिकरण का भी क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। पहले केवल शहर की काॅलोनियों तक सीमित जीडीए ने अपना दायरा पूरब में चौरीचौरा (मुंडेरा बाजार) और उत्तर में पीपीगंज व पिपराइच नगर पंचायत तक बढ़ा दिया है। इस तरह शहर के आसपास बसे 320 गांव अब जीडीए के दायरे में आ गए हैं, जिनमें मूलभूत सुविधाओं के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। जीडीए ने देवरिया और कुशीनगर रोड के बीच खोराबार में नया गोरखपुर बसाने के लिए 272 एकड़ जमीन का अधिग्रहण शुरू कर दिया है। इसके अलावा जंगल कौड़िया से कालेसर के बीच बने फोरलेन के किनारे 300 मीटर चौड़ाई में हाईवे फैसिलिटी जोन विकसित करेगा, जिसमें होटल, पेट्रोल पंप और अन्य सुविधाएं विकसित होंगी। मतलब साफ है कि वहां भी आने वाले समय में आवासीय इलाके विकसित किए जाएंगे।
लिंक एक्सप्रेस-वे और कालेसर के बीच भी बसेगा नया गोरखपुर
कालेसर जीरो प्वाइंट आने वाले कुछ वर्षों में गोरखपुर शहर के अंदर होगा। ऐसा इसलिए कि इस हाईवे के किनारे गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण की तरफ से 200 हेक्टेयर में काॅमर्शियल और आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है। इसके लिए जमीन चिह्नित करने से लेकर प्लॉट की प्लानिंग तक हो चुकी है। यहां से बमुश्किल पांच किलोमीटर दूर जैतपुर में लिंक एक्सप्रेसवे हाईवे से जुड़ रहा है। जैतपुर से कालेसर के बीच कई बिल्डर प्लॉट देख चुके हैं। आगे बाघागाड़ा से लेकर नौसड़ के बीच सड़क के दोनों तरफ शहर बस चुका है। सड़क के पश्चिम तरफ गीडा का क्षेत्र है और इस इलाके में लगातार छोटी-छोटी फैक्टरियों के लिए जमीन का आवंटन हो रहा है। बीच में गीडा दफ्तर के पास तमाम काॅलेज खुल चुके हैं।
वनसप्ती देवी स्थान से तालनदोर तक बस रही है आबादी
देवरिया रोड पर वनसप्ती देवी स्थान कुछ वर्ष पहले तक सुनसान जगह हुआ करता था, लेकिन अब यहां से निकली पतली सड़क पर हरदम वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। यह सड़क आगे जाकर बाईपास को पार कर तालनदोर पहुंचती है। इस इलाके में लोकसभा चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री ने एनसीसी प्रशिक्षण केंद्र का शिलान्यास किया था। इसके बगल में 55 एकड़ जमीन पर ऐश्प्रा समूह की तरफ से आवासीय कॉलोनी बसाने के लिए मिट्टी भराई का काम चल रहा है। यहां ढाई हजार से तीन हजार रुपये वर्ग फुट के हिसाब से लोग प्लॉट के लिए एडवांस बुकिंग कर रहे हैं।
भटहट-बांस स्थान रोड के किनारे तक बिक गईं जमीनें
पांच साल पहले तक मानीराम शहर से बाहर गिना जाता था, लेकिन भटहट के पास आयुष विश्वविद्यालय बनने और वहां तक फोरलेन बनने के बाद लोग भटहट-बांस स्थान और जंगल कौड़िगा-जगदीशपुर बाईपास पर पिपराइच के पास तेजी से जमीन खरीद रहे हैं। पिपराइच निवासी विजेंद्र साहनी बताते हैं कि जो जमीन पांच साल पहले 500 रुपये वर्ग फुट की दर से नहीं बिकती थी, वही अब ढाई हजार रुपये वर्ग फुट की दर से बिक रही है।
गोरखपुर बिहार और नेपाल के लिए गेटवे जैसा है। यहां मूलभूत सुविधाओं के तेजी से विकास, बेहतर माहौल, शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों की उपलब्धता ने लोगों को अनुकूल माहौल दिया है। इसीलिए जो लोग बड़े शहरों में घर बनाने का सपना देख रहे थे, उन्हें गोरखपुर में वह सभी संभावनाएं नजर आ रही हैं। अच्छी कनेक्टिविटी किसी भी शहर के विकास की पहली जरूरत है और इसे पूरा करने के नाते ही गोरखपुर का तेजी से विकास हो रहा है।
- किशन सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता, जीडीए