जब घटना होनी होती है, तब मति मारी जाती है। ठीक इसी तरह आजमगढ़ की युवती के साथ भी हुआ। छह बहनों में पांचवें नंबर की बहन (20) का घर पर खाना बनाने को लेकर झगड़ा हो गया। दो मई की सुबह वह नाराज होकर निकल गई।
युवती घर से तीन हजार रुपये लेकर निकली। उसने बड़ी बहन की ससुराल बदायूं जाने के लिए बस भी पकड़ी। कंडक्टर ने मोबाइल से युवती के पिता से बात कराई। इसके बाद पिता ने कंडक्टर से कहा कि टिकट मत काटना। तब युवती दूसरी बस में सवार हो गई।
पुलिस ने बताया कि आजमगढ़ में युवती बस में सवार होने से पहले एक दुकान पर सिम लेने गई। वहां युवती का आधार कार्ड नहीं लग पा रहा था। इस पर बगल में खड़े संतकबीरनगर के ट्यूबवेल काॅलोनी मोतीनगर खलीलाबाद निवासी ताहिर अली ने अपना आधार कार्ड दुकानदार को देकर युवती को सिम दिलवाया।
इसके बाद ताहिर अली ने बातचीत में फंसाकर युवती का विश्वास जीत लिया। उसने युवती को नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इस पर युवती ने बदायूं जाना कैंसिल कर दिया। वह नौकरी पाने की खातिर ताहिर के साथ गोरखपुर आ गई।
आधार कार्ड से पकड़ गया ताहिर
पुलिस ने बताया कि ताहिर के पास रुपये नहीं थे। उसने युवती से लेकर अपना भी टिकट कटवाया। यही नहीं युवती के रुपये से ही उसने शराब भी पी थी। सहजनवां थाना क्षेत्र के रानूखोर गांव के सिवान में ही ताहिर के दोस्त का भाई मिला।
उसने ताहिर के साथ युवती को देखकर कमेंट किया कि अकेले-अकेले, इस पर ताहिर ने उसे भी साथ ले लिया। पुलिस ने बताया कि वारदात के पास आरोपियों की पहचान करना आसान नहीं था, लेकिन घटनास्थल पर युवती के बैग से ताहिर का आधार कार्ड मिला।
युवती ने बताया कि सिम खरीदते समय ताहिर का आधार कार्ड इस्तेमाल किया था। तभी आधार बदल गया। उसका आधार मेरे पास आ गया। पुलिस ने बताया कि ताहिर का आधार मिलने के बाद पुलिस उसे तलाश ही रही थी, तभी वह मिल गया।