गोरखपुर। एकला बांध के पास बरामद की गई हाइड्रोपोनिक वीड (हाईब्रिड गांजा श्रेणी का ड्रग) को बैंकॉक से मंगाया गया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसे छोटे-छोटे पैकेट में पैक कर शहर के बार, क्लब और नेपाल के कैसिनो में खपाने की तैयारी थी। इस गिरोह का सरगना बड़हलगंज निवासी सैम उर्फ विपुल फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद ड्रग्स को शहर और आसपास के इलाकों में सप्लाई करने से पहले पैकेजिंग की जा रही थी। ओसियन ग्रीन हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार किया जाने वाला यह ड्रग सामान्य गांजे की तुलना में कहीं अधिक नशे वाला होता है। इसके साथ स्मैक (हेरोइन) की भी बरामदगी हुई है, जो अत्यंत खतरनाक नशीला पदार्थ माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्मैक की लत बहुत तेजी से लगती है। इसके सेवन से जान तक जाने का खतरा बना रहता है।
आरोपियों से पूछताछ और जांच में सामने आया है कि बड़हलगंज क्षेत्र के सिधुआपार गांव निवासी सैम उर्फ विपुल इस पूरे नेटवर्क का सरगना है। वह बैंकॉक से ड्रग्स मंगवाकर अपने स्थानीय सहयोगियों के माध्यम से सप्लाई कराता था। पुलिस का कहना है कि तस्करी के लिए जिन वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा था, उनमें से एक गाड़ी सैम के नाम पर पंजीकृत है, जिससे उसके सीधे संलिप्त होने के पुख्ता सबूत मिले हैं।
एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि यह मामला केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है। मादक पदार्थों की पूरी सप्लाई चेन, उसके स्रोत, फंडिंग और नेटवर्क में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरगना सैम उर्फ विपुल की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
गिरोह में शामिल हैं युवा
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में शामिल अधिकांश आरोपी युवा हैं। कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में वे इस खतरनाक धंधे में उतर गए। हाइड्रोपोनिक वीड की खासियत यह है कि इसे आसानी से छिपाकर बेचा जा सकता है। इसकी कीमत भी अधिक मिलती है, जिससे तस्करों को भारी मुनाफा होता है।
पहले पकड़ा जा चुका है अमेरिकन गांजा
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की टीम ने नवंबर 2025 में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने दाउदपुर में छापा मारकर एक कार सवार तस्कर को 170 ग्राम अवैध अमेरिकन ऑर्गेनिक गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 17 लाख रुपये बताई गई थी।
हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाते हैं
हाइड्रोपोनिक वीड गांजा (कैनाबिस) की एक हाईब्रिड और अत्यधिक नशे वाली किस्म है, जिसे मिट्टी के बजाय हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाया जाता है। इसमें नियंत्रित रोशनी, तापमान और पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और नशे की क्षमता सामान्य गांजे से कहीं अधिक होती है। इसमें टीएचसी की मात्रा अधिक होने के कारण इसका प्रभाव तेज और खतरनाक होता है। इसे छोटे पैकेट में आसानी से छिपाकर बेचा जा सकता है, इसलिए इसकी तस्करी तेजी से बढ़ी है। भारत में यह एनडीपीएस एक्ट के तहत पूरी तरह अवैध है।