इसका वैज्ञानिक नाम सिटासिफोर्मीस है। करीब एक तिहाई तोता जातियां विलुप्ति के कगार पर हैं। अपने रंग-बिरंगे पंखों और घुमावदार चोंच के कारण यह काफी खूबसूरत होते हैं। अक्सर नर और मादा तोते की पहचान करना बहुत मुश्किल होता है।
तोतों को अवैध तरीके से पकड़ने और तस्करी करने वाले बड़ी संख्या में मिल जाते हैं। तस्करी के दौरान सैकड़ों की संख्या में हर साल तोते मर भी जाते हैं। इससे जैव विविधता को क्षति पहुंच रही है। इन्हीं कारणों से वर्तमान में तोतों का झुंड दिखाई नहीं देता है।
तोते विलुप्त होने के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। अवैध शिकार के अलावा इनके लुप्त होने का बड़ा कारण प्राकृतिक आवास का खत्म होना भी बताया जा रहा है। वनों की कटाई, पर्यावरण प्रदूषण, जंगल की आग, भोजन की अनुपलब्धता और जलवायु परिवर्तन भी तोतों पर आए संकट की वजहें हैं।
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान प्रो डीके सिंह ने कहा कि अवैध शिकार, वनों का विनाश और प्रदूषण के चलते तोते कम होते जा रहे हैं। तोतों की घटती संख्या पर्यावरण और जैव विविधता के लिए नुकसानदायक है।
गोरखपुर डीएफओ विकास यादव ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत तोतों का शिकार करना और उन्हें बेचना व पालना जुर्म है। ऐसा करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। सजा के लिए विधिक कार्रवाई की जाएगी।