मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि शहरी क्षेत्र के पचास फीसदी घरों में डेंगू के वाहक मच्छरों के ब्रीडिंग साइट्स पाए जा चुके हैं, जिन्हें नष्ट कराया जा चुका है। पिछले साल संस्था की मदद से 42327 घरों में जाकर सर्वे किया गया था। कुल 10190 कूलर जबकि 12321 फ्रीज चेक किए गए। इनमें से 21751 मच्छरों के ब्रीडिंग साइट्स पाए गए जिन्हें लोगों को जागरूक कर नष्ट करवाया गया। जिन घरों में सर्वे किया गया वहां से 3235 लोग बुखार के रोगी पाए गए।
उन्होंने बताया कि इस बार कोरोना के प्रसार के कारण साफ-सफाई और सैनेटाइजेशन पर विशेष जोर रहा है, इसलिए मच्छरों का प्रकोप थोड़ा कम हुआ है। हालांकि सितंबर माह की बारिश के बाद साफ पानी का जमाव चुनौती दे सकता है। इसलिए लोगों को चाहिए कि कूलर, फ्रीज, गमला, छत पर फेके गए टायर आदि में साफ पानी न इकट्ठा होने दें। डेंगू के मच्छर का लार्वा पनपने के लिए एक चम्मच साफ पानी ही काफी है, इसलिए सभी को साफ पानी के जमाव से सतर्क रहना होगा।
डेंगू को जानिए
- प्लेटलेट का कम होना हमेशा डेंगू नहीं होता है।
- समय से अस्पताल आने पर डेंगू का सस्ता इलाज संभव है।
- समय से चिकित्सालय पहुंचने पर डेंगू जानलेवा रूप नहीं धारण करता।
- चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण एक तरह के होते हैं। चिकित्सकीय जांच के बाद ही पता चल सकता है कि मरीज को डेंगू या चिकनगुनिया।
- चिकनगुनिया के खतरनाक अवस्था में शरीर झुक जाता है और वह कभी ठीक नहीं होता।
- डेंगू और चिकगुनिया एक ही प्रजाति के मच्छर के काटने से होता है और दोनों बीमारियों के मच्छर दिन में काटते हैं।
- मच्छरों से बचाव कर हम चिकनगुनिया और डेंगू समेत सभी मच्छरजनित रोगों पर अंकुश पा सकते हैं।