इसमें एक मोबाइल सिम लगी है, जिसमें 20 नंबर दर्ज किए जा सकते हैं। सभी नंबरों पर ‘अटेंशन प्लीज’ का मैसेज आएगा। इससे किसान सतर्क हो जाएंगे और पशु फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। कॉलेज के निदेशक डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि नवाचार को पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया गया है। पेटेंट होने के बाद बाजार में लाने के लिए यंत्र बनाया जाएगा।
पहचान के लिए जानवरों की हुई है कोडिंग
छात्रों ने पहचान के लिए फोटो के आधार पर जानवरों की कोडिंग की है। नीलगाय, गाय, भैंस, सांड आदि जानवरों के साथ ही कुछ पक्षियों का फोटो भी अपलोड किया गया है। जैसे ही ये जानवर खेत की तरफ बढ़ेंगे, सेंसर इन्हें पहचान लेगा।
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ये उपकरण प्रयोग में लगाए गए
सेंसर युक्त इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस, सोलर पैनल, बैटरी, बर्जर आदि।
गोरखपुर जिले में फसल की बुवाई का आंकड़ा
फसल रकबा (हेक्टेयर में)
गेहूं 1,92,000
धान 1,36,000
जौ 1697
तोरी 3134
सरसों 3464
अलसी 47
चना 380
मटर 2632
मसूर 1654