एम्स गोरखपुर में लंबे समय से लेखाकार पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे संस्थान की कार्यप्रणाली और छात्रों से जुड़े वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान में यह जिम्मेदारी बायोकेमेस्ट्री विभाग के विभागाध्यक्ष को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है।
छात्रों का आरोप है कि दोहरी जिम्मेदारी के कारण न केवल प्रशासनिक कार्यों में देरी हो रही है, बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। छात्रों के अनुसार, 25 दिसंबर 2024 से लेखाकार का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे विभागाध्यक्ष को विभागीय शिक्षण कार्य के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
इसका असर बायोकेमेस्ट्री विभाग की पढ़ाई पर पड़ रहा है। छात्रों ने शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2024 में विभाग में 125 छात्र असफल हुए, जो अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन बताया जा रहा है। आरोप है कि दोहरी जिम्मेदारी के चलते कई छात्र लगातार परीक्षा में असफल हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर 26 और 27 जनवरी को छात्रों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद प्रबंधन हरकत में आया।
पहले भी प्रशासन ने विभागाध्यक्षों से रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय स्तर पर भी विचार किया जा सकता है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, यह प्रबंधन की प्राथमिकता है और नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।