असलहा तस्कर धीरेंद्र मोहन तिवारी उर्फ डिस्को एक बार फिर तमंचे के साथ पकड़ा गया तो चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। फिर से वर्ष 2011 में होली के दिन पीपीगंज नयनसर में हुए दोहरे हत्याकांड की याद ताजा हो गई। डिस्को और उसके साथियों ने गोलियाें की बौछार कर कई परिवार की होली हमेशा के लिए बदरंग कर दी थी।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2011 में होली के दिन पीपीगंज के नयनसर गांव निवासी अमित तिवारी और छोटू तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि एक अन्य को भी गोली लगी थी, जो इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। इसमें डिस्को तिवारी समेत अन्य पर नामजद केस दर्ज हुआ था।
खुद काे समाजसेवी बताता है डिस्को
सूत्रों की मानें तो एक नेता की सरपरस्ती में डिस्को खुद को समाजसेवी बताता है। दबंगई दिखाने के लिए वह कभी चार पहिया गाड़ी पर हूटर बजाते हुए चलता है। कई बार वह शादी में डांस कार्यक्रम में गोलियां चलाकर भी चर्चा में आ चुका है।
बिहार से असलहा लाता है हिस्ट्रीशीटर
डिस्को तिवारी पर 28 केस हैं, दस से अधिक बार वह जेल जा चुका है। अवैध असलहों की तस्करी से वह चर्चा में आया। बताया जाता है कि डिस्को बिहार से असलहे की खेप गोरखपुर लाता था। पुलिस इसे कई बार अवैध असलहे के साथ पकड़कर जेल भेजवा चुकी है। जेल से छूटने बाद वह फिर अवैध असलहा लेकर घूमने लगता है।
जानें क्यों नाम पड़ा डिस्को
हिस्ट्रशीटर धीरेंद्र मोहन तिवारी उर्फ डिस्को के लिए जेल जाना नई बात नहीं है। हर बार जेल से बाहर आता है और फिर नए कारनामे कर अंदर जाता है, लेकिन इस बदमाश का नाम डिस्को क्यों पड़ा, ये विचार हर किसी के मन में आता है।
ग्रामीणों ने बताया कि वह बचपन में गोरा चिट्टा था। इसलिए उसे लोग दुलार में डिस्को बुलाते थे। आगे चलकर इसी नाम से उसे पुकारा जाने लगा। इसलिए पुलिस भी धीरेंद्र को पकड़ने के बाद उसके नाम में डिस्को जोड़ती है। ताकि इस बदमाश की करतूत लोग जान सकें। वर्तमान में इसकी पत्नी विभा सिंह भीटी की ग्राम प्रधान भी है।