निचलौल। पिपराकाजी गांव में होनी वाली रामलीला मंचन का अंग्रेजी हुकूमत के दौर से ही गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां आयोजित रावण मेला हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक अनोखी मिसाल पेश करता है। अंग्रेजी हुकूमत के दौर से ही गांव के हिंदू और मुस्लिम एक साथ मिलकर रावण का पुतला तैयार करते हैं। इस बार रावण का 51 फुट का पुतला तैयार किया गया है। 3 नवंबर को राम से युद्ध के दौरान पुतला दहन किया जाएगा।
रावण का पुतला तैयार करने में जुटे कारीगर निसरु, नईम, अलाउद्दीन, नथुनी चौधरी ने बातचीत में बताया कि पूर्वजों से उन्होंने यह हुनर सिखाया था। बुजुर्ग रामनरेश प्रजापति की अगुवाई में रावण का पुतला बनाया जाता है। वर्षों से लोग रावण का पुतला तैयार कर रहे हैं। हम लोग हर वर्ष रामलीला मंचन का इंतजार करते हैं। फिर पूरे परिवार के साथ मिलकर इस कार्य में जुट जाते हैं। हिन्दू-मुस्लिम एक जाजम पर बैठकर रावण का पुतला बनाते हैं।
पिपराकाजी गांव के पूर्व ग्राम प्रधान नाथू चौधरी (75) ने बताया कि बचपन में उनके बाबा कहते थे कि वर्ष 1916 में ही गांव के सम्मानित परिवारों की अगुवाई में रामलीला का आयोजन किया गया था। तभी से गांव में रामलीला आयोजन किया जा रहा है। तब कई कोस की दूरी तय करके लोग मेला में पहुंचते थे। हर वर्ष दिवाली के बाद शुक्ल पक्ष के पंचमी से रामलीला मंचन का शुभारंभ होता है। मंचन के तीसरे दिन महर्षि वशिष्ठ की ओर से यज्ञ किया जाता है।
रामलीला खेलकूद के नाम से है एक एकड़ भूमि
निचलौल। गांव के भूपेंद्र सिंह, जोखन, मोदीन बताते हैं कि गांव के प्राथमिक विद्यालय के निकट रामलीला खेलकूद के नाम से करीब एक एकड़ जमीन है। यह जमीन चकबंदी के समय रामलीला के नाम से छोड़ा गया है। इसी जमीन में रामलीला मंचन का भव्य आयोजन किया जाता है। रामलीला के दसवें दिन भगवान राम और रथ पर सवार 51 फुट ऊंचे रावण के बीच युद्ध होता है। रावण दहन के बाद युद्ध समाप्त होता है।
हैजा से बचने के लिए शुरू की गई थी रामलीला
निचलौल। सुभानअली, मजीद और अवधेश दास ने कहा कि बुजुर्ग बताते हैं सौ वर्ष पहले गांव में अचानक हैजा फैलने से ग्रामीण काफी परेशान हो गए थे। इसी बीच गांव में एक बाबा आए रामलीला का आयोजन करने को कहा। तभी से गांव में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। पहले गांव के ही मंडलीय समिति की ओर से रामलीला का मंचन किया जाता था। लेकिन अब बाहर से रामलीला मंडली आती है।