इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी गई थी।अपीलार्थी की ओर से दलील दी गई कि निर्वाचन न्यायाधिकरण ने महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की। फॉर्म-7ए में राजनीतिक दल की ओर से घोषित उम्मीदवार के विवरण में पति का नाम गलती से श्याम लाल दर्ज हो गया था, जबकि याची के पति का नाम परशुराम है।
फॉर्म तैयार करने वाले गवाह राजेश कुमार गुप्ता ने भी अपनी गवाही में स्पष्ट किया था कि याची ही भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार थीं। अपील में यह भी कहा गया कि संपत्ति का विवरण छिपाने के आरोप पर निर्वाचन न्यायाधिकरण ने यह विचार नहीं किया कि कथित चूक का चुनाव परिणाम पर वास्तव में कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।