सड़क पर ही रोडवेज, प्राइवेट बसों और ऑटो का स्टैंड होने की वजह से राहगीरों की मुश्किलें बढ़ गई है। मामला नया तो नहीं है, लेकिन अफसरों की अनदेखी की वजह से मुसाफिरों का सफर मुश्किल भरा हो गया है। यह हाल तब है जब इसे हटाने के लिए छह महीने पहले तब के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी आदेश दिया तो एसएसपी ने एक टीम तक गठित कर दी थी। बकायदा एक एक सड़क की एक एक पुलिस को अफसर को जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। लेकिन, इसे हटाने में न ही परिवहन विभाग की दिलचस्पी है और न ही पुलिस ही ध्यान दे रही है।
जानकारी के मुताबिक, अवैध स्टैंड को हटाने के लिए कई बार कवायद हुई है। जब भी कोई जिम्मेदार हस्तक्षेप करता है तो पुलिस से लेकर परिहवहन विभाग और रोडवेज प्रशासन तक दो से तीन दिन का अभियान चलाना शुरू कर देते हैं।
ऐसा लगता है कि इस बार का अभियान ऐसा होगा कि अवैध स्टैंड हट जाएगा और आम लोगों की गाड़ियां फर्राटा भरेंगे, लेकिन ऐसा होता कभी नहीं है। अभियान दो दिन बाद ही औंधे मुंह गिर जाता है और फिर से मुसाफिर उसी सांसत में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं।