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Gorakhpur News: महायोजना : खाली जगह को आवासीय... आबाद क्षेत्र को दर्शाया ग्रीन बेल्ट

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सिंघड़िया के लोगों का आरोप-जीडीए की महायोजना के ले आउट में नहीं रखा गया ध्यान
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शहर की 25 काॅलोनियाें को किया नियमित, जहां सबसे अधिक भीड़ उसे छोड़ दिया
लोगों ने प्रशासन पर लगाया सौतेले व्यवहार का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जीडीए की महायोजना 2031 में शहर का दायरा दक्षिण में एनएच 28 बाईपास से आगे, उत्तर में पिपराइच और पीपीगंज नगर पंचायत तक पहुंचने की संभावना के आधार पर सड़क, ग्रीन बेल्ट और अन्य सुविधाएं प्रस्तावित की गई हैं। इसी आधार पर बिना स्वीकृति के बसीं 25 काॅलोनियों को वैध कर दिया गया, लेकिन महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर 2, सिंघड़िया (मदन मोहन मालवीय नगर) मोहल्ले को ग्रीन बेल्ट में शामिल कर लिया गया। इस हिसाब से खाली स्थानों को आवासीय और पहले से आबाद क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट बताकर मुसीबत में डाल दिया।
अपने घरों के टूटने की आशंका से परेशान लोगों का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह सौतेला व्यवहार केवल नए विकसित हो रहे इलाकों में प्लाॅटिंग करा चुके धंधेबाजों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। ऐसा इसलिए कि अगर रामजानकीनगर, महादेवपुरम, शक्तिनगर और इंदिरानगर जैसी काॅलोनियों को वैध किया जा सकता है तो उनसे पहले बसे सिंघड़िया के लोगों से क्या दुश्मनी है।
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जीडीए की महायोजना 2031 में 46 प्रतिशत भू-भाग आवासीय, 15 प्रतिशत सड़क और 20 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट के लिए प्रस्तावित है। सिंघड़िया मोहल्ले के लोगों को करीब दो साल पहले जब जीडीए की महायोजना में ग्रीन बेल्ट प्रस्तावित होने की जानकारी हुई, तभी से वे परेशान हैं। यहां के लोगों ने अफसरों के सामने करीब 1200 आपत्तियां भी डालीं।
श्रवणनगर काॅलोनी निवासी रिटायर्ड फौजी दिग्विजय नारायण पाठक कहते हैं-हमारी आपत्तियों को निस्तारित करते हुए बताया गया था कि इस काॅलोनी को भी वैध किया जाएगा, फिर किसके दबाव में ऐसा नहीं हुआ।
आदर्शनगर गोमती टोला निवासी अरविंद यादव सवाल करते हैं कि अगर हमारा मोहल्ला कृषि क्षेत्र, बाग या हरित पट्टी के दायरे में है तो यहां अब सब घर बन चुके हैं, पेड़ कहां लगाएंगे। अगर 25 मोहल्ले वैध हैं तो यही एक मोहल्ला अवैध कैसे हो गया।
साईं धाम काॅलोनी निवासी जोगिंदर सिंह कहते हैं-ऐसा लगता है कि भू-माफिया ने ही कोई खेल कर दिया। ग्रीन बेल्ट दर्शाकर इस इलाके को खाली कराएंगे और बाद में फिर प्लाॅटिंग कर बेच देंगे। नहीं तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि जहां पूरी आबादी बसी है, उसे ग्रीन बेल्ट बता दें।
जहां अभी घर नहीं, वे इलाका आवासीय कैसे
राजस्व विभाग के सेवानिवृत्त देव सिंह जीडीए की महायोजना 2031 को ही सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं। कहते हैं-इसे बनाने वालों ने मौके की परिस्थितियों का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा होगा। महायोजना 2021 में ही यह बात स्पष्ट हो गई थी कि शहर तेजी से देवरिया रोड और देवरिया बाईपास के बीच फैल रहा है। रामगढ़ताल के चारों किनारे आबादी बस रही है। इसके बाद भी महायोजना 2031 में सिंघड़िया व महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो को ग्रीन बेल्ट और खेती व ताल-पोखरे वाले क्षेत्र जंगल अयोध्या प्रसाद व उसके आसपास के इलाकों को आवासीय बनाना आश्चर्यजनक है। ऐसा तभी हुआ होगा, जब या तो बिना इलाके को देखे ही नक्शा बना दिया गया हो या फिर कोई बड़ा खेल हुआ हो। स्वर्ण सिटी में रहने वाले अरविंद सिंह कहते हैं-ऐसा लग रहा है कि महायोजना 2031 आम लोगों नहीं, बल्कि जमीन बेचने वालों की सुविधा का ख्याल रखकर प्रस्तावित किया गया है। त्रिलोकी तिवारी कहते हैं कि महादेव झारखंडी का पूरा इलाका आवासीय हो गया और सिंघड़िया ग्रीन बेल्ट हो गया, यह समझ से परे है। पहले सिंघड़िया बसा, इसके बाद लोगों ने सड़क पार महादेव झारखंडी में जमीन खरीदनी शुरू की। दरअसल यह पूरा खेल भू-माफिया के ही इशारे पर किया गया है।
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महिलाएं मुख्यमंत्री से मिलकर सुनाएंगी पीड़ा
प्रशासनिक गलतियों की वजह से परेशान सिंघड़िया व महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो क्षेत्र की महिलाएं अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगी। आंदोलन को आगे बढ़ाने में लगीं महिलाओं का कहना है कि इन घरों को बनवाने के लिए हमने सबसे अधिक कष्ट सहे हैं। निर्माण के दौरान तमाम परेशानियां झेली हैं। अब कुछ सुकून के पल मिले तो इस पर भी अफसरों की कुदृष्टि पड़ गई है, लेकिन हम लोग इसे ऐसे नहीं जाने देंगे। यहां की रहने वाली रागिनी पाठक, सीमा, चंद्रावती, मनोरमा, सुनीता, गिरिजा, गौतम शर्मा, विंद्रावती पांडेय, राजनंदिनी, संगीता आदि का कहना है कि अगर प्रशासन ने गलती नहीं सुधारी तो हर घर की महिला बाहर निकलेंगी। जिस दिन मुख्यमंत्री शहर में आएंगे, बड़ी संख्या में महिलाएं गोरखनाथ मंदिर जाकर मुख्यमंत्री को अफसरों की मनमानी की दास्तां सुनाएंगी।
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