गोरखपुर। मौसम में अनचाहे बदलाव का असर बीमारियों पर भी पड़ रहा है। इस बार जुलाई की गर्मी के चलते आंखों की बीमारी कंजेक्टिवाइटिस तेजी से फैली। सितंबर में अधिक बारिश के चलते पिछले तीन चार साल से डेंगू के मामले नवंबर तक मिल रहे हैं। ऐसे ही कई अन्य बीमारियां भी अपने निर्धारित समय से आगे-पीछे हो रही हैं। मौसम में बदलाव के चलते वायरस के स्वभाव पर क्या असर हो रहा है, इस पर आरएमआरसी के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव से आम लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर होता है। जाड़े और गर्मी के शुरुआत और समापन के संधिकाल पर अक्सर ही नए-नए वायरस रोग फैलाते रहते हैं। ऐसे ही अधिक गर्मी और बरसात के दिनों में भी होता है। अब सर्दी की शुरुआत नवंबर की बजाय दिसंबर से हो रही है और मार्च के आखिरी सप्ताह में अचानक तापमान बढ़ रहा है। वहीं जुलाई से अधिक बारिश अगस्त-सितंबर में हो रही है। इसके चलते वायरल इंफेक्शन का असर लंबे समय तक बना रह रहा है। जुलाई की बारिश के साथ तेजी से बढ़ने वाले मलेरिया और डेंगू के मामले अब अगस्त से शुरू होकर नवंबर तक जा रहे हैं।
मौसम में बदलाव का असर मानव स्वास्थ्य पर जरूर पड़ता है। बारिश की वजह से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों का समय बढ़ रहा है। उमस भरी गर्मी के चलते जुलाई-अगस्त में वायरस का संक्रमण तेज हो रहा है। बीमारियों के लक्षण में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं।
-डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन, जिला अस्पताल
मौसम में बदलाव का असर साफ दिख रहा है। अभी कुछ दिन पहले आंखों की बीमारी फैली थी। पहले सितंबर में डेंगू पीक पर होता था, अब नवंबर तक इसका असर हो रहा है। मौसम में बदलाव व अन्य कारणों से वायरस भी अपने स्वरूप बदलते रहते हैं। ऐसे कई वायरसों के जीनोम सिक्वेसिंग का कार्य चल रहा है।
-डाॅ.अशोक पांडेय, वैज्ञानिक और मानसिक