गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 में बृहस्पतिवार को लगी आग की घटना लापरवाही की वजह से हुई थी। घटना की जांच कर रही तीन सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई खामियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मरीजों की सुरक्षा के साथ हर स्तर पर खिलवाड़ किया गया। आग से सुरक्षा के लिए लगाए गए उपकरण खराब मिले हैं। फायर हाइड्रेंट, होजरील, लैंडिग वाल, फायर अलार्म एवं अग्नि सुरक्षा उपकरण भी काम नहीं कर रहे थे। जांच टीम ने मेडिकल कॉलेज के सभी भवनों और ब्लॉकों का तत्काल वाह्य एजेंसी से फायर ऑडिट कराने का सुझाव दिया है।
मेडिकल कॉलेज में 27 जुलाई की रात करीब दस बजे वार्ड नंबर 14 में आग लगी थी। शासन ने इस घटना की जांच जिला प्रशासन से तत्काल करने के निर्देश दिए थे। जांच टीम ने आग की वजह शार्ट सर्किट बताई है। लेकिन बरती गई लापरवाही को इंगित करते हुए अपने सुझाव भी दिए हैं। इसमें कहा गया है कि प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों का रख-रखाव एवं मरम्मत मानक के अनुसार कराएं, ताकि वह हमेशा कार्यशील रहें। फिक्स अग्निशमन व्यवस्थाएं भी खराब मिलीं। अस्पताल प्रबंधन का इसका रखरखाव कराने को कहा गया है।
इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि फायर ऑडिट कराने के बाद दो वर्षों में न्यूनतम एक बार फायर ऑडिट कराकर हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा फायर ऑडिट में उल्लेखित सुरक्षा निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए। हास्पिटल प्रबंधन द्वारा प्रत्येक 06 माह में (जनवरी एवं जुलाई ) में हॉस्पिटल परिसर में स्थापित अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को चेक कराया जाए और कार्यशीलता संबंधी प्रमाण-पत्र लिया जाए। फायर मॉक ड्रिल भी कराएं, ताकि अस्पताल में स्टॉफ व सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा सके। अग्निशमन व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए राउंड द क्लॉक फायर पंप ऑपरेटर रखते हुए एक प्रशिक्षित अग्निसुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया जाए।
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फायर ब्रिगेड को रात 10: 14 बजे मिली थी आग की सूचना
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि 27 जुलाई की रात 10:14 बजे फायर कंट्रोल रूम को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड नंबर 14 में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर फायर स्टेशन, गोलघर से दो अग्निशमन वाहनों को घटना स्थल के लिए भेजा गया। आईसीयू वार्ड में स्थापित विद्युत वितरण बोर्ड में लगी थी, जिसके कारण वार्ड नंबर 14 व भवन के अन्य भाग में धुआं फैल गया।
मेंटेनेंस न होने से मेन स्विच में हुआ शार्ट सर्किट
जांच टीम में शामिल विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी ने रिपोर्ट में बताया है कि वार्ड में मेन स्विच लगभग पांच वर्ष पूर्व लगाया गया था। समय से इसका मेंटेनेंस नहीं हुआ। मेन स्विच में धूल आने एवं स्विचिंग के कारण कांटेक्ट में एयरगेप आने से रेजीस्टैंस बढ़ गया था। आटो स्विचिंग प्रक्रिया बार-बार होने पर लूज कान्टेक्ट से स्पार्किंग के साथ निकली चिंगारी नीचे रखे फोम के गद्दे एवं ज्वलनशील सामान के ऊपर गिर गई। जिसके कारण आग लगी।
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वर्जन
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लगी आग की जांच की रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को व्यवस्था में सुधार के लिए पत्र लिखा जाएगा। जांच टीम ने जितने भी सुझाव दिए हैं, उससे अवगत कराएंगे।
कृष्णा करुणेश, डीएम