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बेलीपार लूटकांड का खुलासा: हवाला का खेल... बैंकाक से नहीं आए थे रुपये, स्वर्ण व्यापारी के थे

Fri, 29 Dec 2023 10:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

बेलीपार इलाके के जीतपुर गांव के पास धस्का निवासी सुजीत से 12 लाख रुपये लूट में शामिल तीन आरोपियों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर पुलिस ने घटना का पर्दाफाश कर दिया। घटना की साजिश सुजीत के दोस्त शिवम ने रची थी।
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बेलीपार लूट कांड का खुलासा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में बेलीपार लूटकांड का पुलिस ने भले ही पर्दाफाश कर दिया हो, लेकिन आशंका है कि रकम बैंकाक से नहीं आई, बल्कि यह हवाला की है। आशंका है कि यह रकम एक स्वर्ण व्यापारी की है, जिसे हवाला के जरिए खपाया जा रहा था। हालांकि पुलिस आरोपियों से पूछताछ में भी यह पता नहीं लगा सकी कि रकम कहां से आई थी। पहले भी जिले में हवाला की रकम को लेकर कई मामले सामने आ चुके हैं।

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धस्का के सुजीत ने तहरीर देकर बताया कि नार्मल के यादव टोला में रहने वाले श्रीकांत वर्मा नाम के स्वर्ण व्यापारी के मुंशी ने 15 रुपये लिए थे। इसी में से 12 लाख रुपये लेकर नौसढ़ से आगे बढ़ रहा था कि लूट हो गई। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि सुजीत ने हिंदी बाजार के गोपी गली के एक सराफा व्यापारी की दुकान से रकम ली थी।

सूत्रों ने बताया कि इस रकम की हेरफेर दुकान के आस-पास के मिले इनपुट के आधार पर ही हुई थी। बाजार सूत्रों ने बताया कि हिंदी बाजार से हवाला और अवैध सोना-चांदी की खरीद बिक्री का खेल खूब चलता है। कच्चे में खरीदे गए सोने-चांदी की मात्रा के साथ उसकी रकम की भी रिकार्ड नहीं होती है।
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वहीं, सूत्रों ने बताया कि बीते 21 अक्तूबर को महराजगंज में मुठभेड़ के दौरान पकड़े गए गोरखपुर के दो शातिर बदमाश प्रवीण और रामप्रवेश राजभर ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को हलावा की जानकारी दी थी। जांच में सामने आया कि ये दोनों बदमाश हवाला के धंधेबाजों को ही निशाना बनाते हैं, ताकि शिकायत करने कोई आगे न आए और फिर आसानी से बच जाएं। उस समय जांच में सामने आया था कि गोरखपुर के रास्ते नेपाल तक हलावा की रकम को खपाया जाता है। ऐसे ही पहले भी कई बार मामलों में हवाला के कारोबार का नाम आया था।

कार की किस्त देने में हो रही थी दिक्कत
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि लूट की मुखबिरी करने वाला शिवम और वारदात को अंजाम देने वाला रामआशीष आपस में रिश्तेदार हैं। दोनों रिश्ते में भाई लगते हैं। दोनों घूमने-फिरने और लग्जरी लाइफ जीने के शौकीन हैं। इसके लिए अभी हाल में रामआशीष ने फाइनेंस कराकर एक कार खरीदी थी।

इसमें शिवम ने उसे 50 हजार रुपये डाउन पेमेंट करने में मदद की थी। लेकिन, इन दिनों पैसों की तंगी की वजह से मौज-मस्ती तो दूर कार की किस्त देनी भी मुश्किल हो रही थी। रामआशीष प्रधानी का चुनाव भी लड़ने की तैयारी में था। इसके लिए वह लगातार शिवम' से मदद करने को कह रहा था। ऐसे में दोनों ने मिलकर लूट की वारदात को अंजाम दे डाला।
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