पुलिस अफसर आज भी बोलने से कतराते हैं
उस वक्त पूर्वांचल का पारा अचानक चढ़ गया था। बम... बम शंकर... जय हरिशंकर के नारे से आधा शहर गूंज उठा था। हम बात कर रहे है पूर्व कैबिनेट मंत्री व बाहुबली हरिशंकर तिवारी के घर छापेमारी की। उस तिवारी हाता में पुलिस अब तक कदम नहीं रखना चाह रही थी। इस मामले में पुलिस अफसर आज भी बोलने से कतराते हैं।
उस समय गोरखपुर में आईपीएस हेमराज मीणा एसपी सिटी हुआ करते थे। खोराबार के जगदीशपुर में मार्च 2017 में रिलायंस पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से 98 लाख रुपये की लूट हुई थी। एसपी सिटी ने इस मामले में बलिया के छोटू चौबे को रिमांड पर लिया था। पुलिस ने छोटू चौबे से पूछताछ की और बताया कि लूट में सोनू पाठक नाम का व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस का कहना था कि उसकी लोकेशन पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के घर पर मिली थी।
इसी आधार पर एसपी सिटी हेमराज मीणा की अगुवाई में पांच थानों की पुलिस ने बसपा सरकार के पूर्व मंत्री के घर छापा मारा था। करीब 30 मिनट तक छानबीन की और छह लोगों को हिरासत में लेकर निकल गए। इन सबसे थाने में पूछताछ हुई, मगर बाद में एक शख्स अशोक सिंह को ही अवैध असलहा रखने के आरोप में जेल भेजा गया।
बुजुर्ग हरिशंकर तिवारी की अगुवाई में निकल पड़ा था हुजूम
पुलिस ने जब छापेमारी की कार्रवाई की थी तो बसपा से हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी विधायक हो चुके थे। उन्होंने पुलिस से सर्च वारंट भी मांगा था, मगर पुलिस के पास कोई कागजात नहीं थे। यही वजह थी कि पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा था। पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी वहीं रहते थे। इसे तिवारी परिवार ने मुद्दा बनाया। पूर्व मंत्री, पूर्व सभापति और वर्तमान विधायक के आवास पर बिना सर्च वारंट के छापे के विरोध में 24 अप्रैल 2017 को बुजुर्ग हो चुके हरिशंकर तिवारी सड़क पर निकल पड़े।